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लॉकडाउन के बाद मेट्रो और बसों में सफर पर तैयार हुईं गाइडलाइंस, जानें- किन नियमों का करना होगा पालन

डॉ. हर्षवर्धन ने बताया, 'इन गाइडलाइंस के जरिए ट्रैफिक को मैनेज करना भी आसान हो जाएगा। कोरोना वायरस के बाद देश में एक नई तरह की परिस्थितियां पैदा होंगी। ऐसे में हमें बेहतर जिंदगी के लिए कुछ नियमों का पालन करना होगा।'

lockdown metroलॉकडाउन के बाद बदल जाएगा मेट्रो और बस में सफर का तरीका

लॉकडाउन के बाद मेट्रो और बसों में सफऱ करने का तरीका पूरी तरह से बदल जाएगा। अब पहले की तरह खचाखच भरी मेट्रो में सफर नहीं होगा और न ही भीड़ भरी बसों में यात्रा करनी होगी। दरअसल लॉकडाउन के बाद सार्वजनिक परिवार की नई व्यवस्था कैसी होगी, इसके लिए केंद्र सरकार ने गाइडलाइंस तैयार कर ली हैं। सरकार की ओर से सोमवार को साझा की गई इन गाइडलाइंस के मुताबिक कोरोना के संकट से निपटने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सोशल डिस्टेंसिंग का पूरी तरह से पालन करना होगा। इसके अलावा ऑफिस टाइमिंग्स में भी बदलाव होंगे ताकि एक ही समय पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट में बड़े पैमाने पर लोगों की मौजूदगी न हो।

गाइडलाइंस जारी करते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बताया, ‘इन गाइडलाइंस के जरिए ट्रैफिक को मैनेज करना भी आसान हो जाएगा। कोरोना वायरस के बाद देश में एक नई तरह की परिस्थितियां पैदा होंगी। ऐसे में हमें बेहतर जिंदगी के लिए कुछ नियमों का पालन करना होगा।’ काउंसिल ऑफ साइंटिफिक ऐंड इंडस्ट्रियल रिसर्च और सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टिट्यूट की ओर से इन गाइडलाइंस को तैयार किया गया है। इनमें यह बताया गया है कि कोरोना के संकट के बाद पब्लिक ट्रांसपोर्ट में क्या करना है और क्या नहीं। इसके अलावा सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों के पालन को लेकर भी जानकारी दी गई है।

मेट्रो स्टेशनों पर भी होगी सोशल डिस्टेंसिंग: सरकार ने सभी बस अड्डो, फुटपाथ पर ऐसी पेंटिंग तैयार कराने का फैसला लिया है, जिनमें सोशल डिस्टेंसिंग पर जागरूकता संबंधी बातें लिखी होंगी। इसके अलावा लोगों के सवार होने और उतरने के लिए मेट्रो और बसों के स्टॉपेज टाइम में इजाफा किया जाएगा। यात्रियों के चढ़ने और उतरने के लिए गेट अलग होंगे, जिनका कड़ाई से पालन किया जाएगा। मेट्रो में सफर के दौरान ही नहीं बल्कि स्टेशन पर भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाएगा। जैसे एस्केलेटर्स पर एक से दूसरे यात्री के बीच 5 सीढ़ियों की दूरी होगी।

सड़कों पर ट्रैफिक की समस्या भी होगी हल: दरअसल सरकार का मानना है कि दफ्तरों की टाइमिंग में बदलाव से यह समस्या हल हो सकती है। इससे ज्यादातर लोग एक ही समय पर ऑफिस न जाएंगे और न ही वापस लौटेंगे। टाइमिंग अलग होने से निजी वाहनों से आने-जाने वाले लोगों को भी आराम होगा क्योंकि सड़कों पर जाम से बचा जा सकेगा।

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