कोरोना संकट के बीच झारखंड को केंद्र सरकार से पर्याप्त मास्क, पीपीई किट्स और वेंटिलेटर नहीं मिल रहे हैं। सूबे के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता का कहना है कि उनके यहां सिफ चार पांच दिन का स्टॉक ही शेष है। ऐसे में अगर मोदी सरकार ने मदद न की, तो उनके सूबे में कोरोना की जांच रुक सकती है।

केंद्र से शनिवार को इस गुहार के साथ उन्होंने कहा है कि राज्य को अभी तक मांग के मुताबिक वेंटिलेटर, थर्मल स्कैनर और वीटीएम किट्स नहीं मिलीं हैं। सूबे में बहुत ही कम संख्या में मास्क और पीपीई भेजे गए हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ.हर्षवर्धन के साथ राज्यों के स्वास्थ्य मंत्री की हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान गुप्ता ने कहा था- हमने 1.1 लाख N-95 मास्क मांगे थे, जिसमें हमें सिर्फ 10,000 ही मिले। हमने 1.34 लाख पीपीई किट्स मांगी थी, लेकिन महज 6,000 किट्स ही दी गईं। हमने 300 वेंटिलेटर और 10 हजार वीटीएम और थर्मल गन्स की मांग रखी थी, जो कि अभी तक नहीं मिली हैं।

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उन्होंने आगे कहा- राज्य कोरोना को काबू करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है। चूंकि, झारखंड एक ‘आदिवासी पिछड़ा गरीब राज्य’ है, इसलिए इसे केंद्र की ‘दुआओं’ की जरूरत है।

बकौल सूबे के स्वास्थ्य मंत्री, “हम कड़ी मेहनत कर रहे हैं और केंद्र द्वारा चिह्नित कंपनियों से सामान खरीद रहे हैं। पर हमें केंद्र की मदद भी चाहिए। सभी संक्रमितों में आठ रिकवर हो चुके हैं। मैंने केंद्र सरकार को बताया है कि हमें टेस्टिंग और एक्सट्रैक्शन किट्स चाहिए। हमारे पास महज चार से पांच दिन का ही स्टॉक है। बगैर मदद के टेस्ट रुक जाएंगे।”

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कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्र ने कहा था कि कुछ सामान भेजा गया है, जबकि अभी और भेजा जाना है। हालांकि, इस पर बन्ना गुप्ता ने असहमति जताई। उन्होंने Indian Express को बाद में बताया, “मैंने इस बाबत जब डेटा गड़बड़ होने की बात उठाई, तब कुछ वक्त के लिए वे लोग शांत हो गए थे। उसके बाद वे उनकी मुझसे बात न हुई।”

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