
महिला दिवस के मौके पर पढ़ें लक्ष्मण सिंह रावत की कविता- क्यों स्त्री होना आसान नहीं होता?

महिला दिवस के मौके पर पढ़ें लक्ष्मण सिंह रावत की कविता- क्यों स्त्री होना आसान नहीं होता?

यह कहानी शुरू होती है कश्मीर से जहां एक हिन्दू नौजवान विजय की प्रेम गाथा से जो एक मुस्लिम लड़की…

साहित्य में मूल्यवान वही माना गया जो मानवीय मूल्यों के साथ चले। लेकिन बीसवीं सदी के अंत में सोवियत रूस…

मीरा की एक दूर की संबंधी शेलोमो अल्फासा उनके बारे में बताती हैं कि 26 वर्ष की उम्र में मीरा…

पिता-पुत्र या भाई-भाई के भिन्न विचारों को लेकर होने वाले झगड़े या मनमुटाव को हमारा समाज सामान्य रूप में स्वीकार…

साहित्य और चेतना को मुक्त होने की वकालत करती निराला की ये पंक्तियां शब्दों की दुनिया के कारीगरों से बहुत…

निराला ने कविता के साथ गद्य लेखन भी खूब किया है। उन्होंने गद्य को ‘जीवन संग्राम की भाषा’ कहा है।

मौजूदा दौर को जिन हर्र्फोंं, तर्कों और हवालों में हम सबसे ज्यादा महसूस कर सकते हैं, वे हैं- आंदोलन की…

जवाहरलाल नेहरू अगर कथित नवनिर्माण की बात करते हैं, तो दीनदयाल उपाध्याय शाश्वत, सनातन व्यवस्था पर आधारित पुननिर्माण की बात…

‘ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस इंडिया’ के प्रबंध निदेशक शिवरामकृष्णन वेंकटेश्वरन ने कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ को कई क्षेत्रों के लोगों के…

हिंदी में संज्ञा पदों के नाम-निर्धारण की पद्धति का अगर विश्लेषण किया जाए, तो एक बात बहुत स्पष्ट है। अगर…

मंटो ने विभाजन का विरोध किया, इसे पागलपन कहा। उस समय बॉम्बे में रहते हुए जब वे फिल्मों के लिए…