ताज़ा खबर
 

सआदत हसन मंटो: विभाजन का विरोध किया तो पागल कहलाए, इस वजह से जाना पड़ा था पाकिस्तान

मंटो ने विभाजन का विरोध किया, इसे पागलपन कहा। उस समय बॉम्बे में रहते हुए जब वे फिल्मों के लिए लेखन कर रहे थे, फिल्मी दुनिया से जुड़े मुस्लिमों को खतरनाक धमकियां मिलने के कारण उन्हें पाकिस्तान के लिए प्रस्थान करना पड़ा।

manto

तीन दिन पहले, 18 जनवरी को, सआदत हसन मंटो (1912-1955) की पुण्यतिथि थी, जिन्हें मैं दुनिया के महानतम कहानीकारों में से एक मानता हूं, और जिनकी तुलना मोपसां ( Maupassant), सोमरसेट मौघम ( Somerset Maugham), डी. एच लॉरेंस ( D.H.Lawrence ), ओ हेनरी ( O Henry ), प्रेमचंद आदि से की जा सकती है।

मुझे मंटो से मिलने का सौभाग्य कभी नहीं मिला, लेकिन सिविल लाइंस, इलाहाबाद के कॉफ़ी हाउस में उनके दोस्त उपेंद्र नाथ अश्क से मैं अक्सर मिलता था, जो स्वयं एक प्रसिद्ध हिंदी कहानी साहित्यकार थे (तब मैं इलाहाबाद उच्च न्यायालय में वकील था)। 1941 और 1942 में अश्कजी दिल्ली स्थित ऑल इंडिया रेडियो में मंटो के सहयोगी रह चुके थे और उन्होंने मुझे मंटो के बारे में बहुत कुछ बताया (उन्होंने उन पर एक किताब भी लिखी, जो ‘मंटो मेरा दुश्मन’ के नाम से प्रसिद्ध है)। अश्कजी ने मुझे बताया कि मंटो एक भावनात्मक, गुस्सैल, अति संवेदनशील व्यक्ति थे।

मंटो की कहानियाँ जैसे- ‘खोल दो’, ‘बू’, ‘काली शलवार’, ‘धुआँ ‘ आदि को कुछ लोगों द्वारा अश्लील भी कही गई हैं (जैसे कि मोपसां की कहानियाँ) और उन्होंने अक्सर समाज के घिनौने, मलिन, निर्बल और भद्दे पक्ष को ज़ाहिर किया, जो उस समय कोई अन्य लेखक करने की हिम्मत नहीं करता था। अश्लीलता के जुर्म में 6 बार अदालत में उनके खिलाफ मुक़दमे चले, हालांकि उन्हें कभी भी दोषी नहीं ठहराया गया। उन्होंने खुद कहा “लोग मेरी कहानियों को गंदा कहते हैं, लेकिन ऐसा इसलिए है क्योंकि आपका समाज गंदा है। मैं केवल सच कहता हूं ”।

मंटो ने विभाजन का विरोध किया, इसे पागलपन कहा। उस समय बॉम्बे में रहते हुए जब वे फिल्मों के लिए लेखन कर रहे थे, फिल्मी दुनिया से जुड़े मुस्लिमों को खतरनाक धमकियां मिलने के कारण उन्हें पाकिस्तान के लिए प्रस्थान करना पड़ा। लाहौर में उनकी दोस्ती फैज़ अहमद फैज़, नासिर काज़मी, अहमद राही, अहमद नदीम कासमी और अन्य लेखकों से हुई। वे अक्सर उनसे पाकिस्तान टी हाउस में मिलते थे। लेकिन वह पाकिस्तान में कभी खुश नहीं थे। 43 साल की उम्र में ज़्यादा शाराब पीने के कारण लिवर कैंसर की बीमारी से वे चल बसे।

विभाजन के बारे में मंटो की कहानियाँ ‘ठंडा गोश्त ’, ‘तिथवाल का कुत्ता’, ‘टोबा तेक सिंह’, आदि मनुष्यों के भयानक पशुवत प्रवृत्ति को उजागर करती हैं, जो केवल सांप्रदायिक घृणा से भरे हुए थे। वे पत्र जो उन्होंने अंकल सैम ( Uncle Sam i,e. America) को लिखे थे वह असल में पाकिस्तान पर एक व्यंग्य है, जिसमें लिखा था कि वह अमेरिका का एक नव-उपनिवेश बन गया है। अफ़सोस है कि इतने बड़े लेखक की इतनी जल्दी मौत हो गई।

– जस्टिस मार्कंडेय काटजू, पूर्व न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया

Next Stories
1 कोरोना टीकाकरण पर जारी सियासत क्यों है देश के लिए घातक?
2 मकर संक्रान्ति को क्यों कहते हैं देवताओं का प्रभातकाल? जानिये इस पर्व का महत्व
3 विश्व धर्म महासभा को संबोधित करने के बाद क्यों रातभर रोते रहे स्वामी विवेकानंद? पढ़ें पूरा किस्सा
ये पढ़ा क्या?
X