यह बढ़ते भोगवाद का ही प्रमाण है कि आज ऊर्जा के हर आसन्न संकट के बावजूद अधिकतर लोग अपने बिजली…
आज जीवन व्यावसायिक और आर्थिक चुनौतियों के आगे समर्पण करता जा रहा है।
सोनिया गांधी के दौर में लोकतंत्र इतना कमजोर कर दिया गया था कि उनकी मर्जी से प्रधानमंत्री बनते थे, जनादेश…
सड़कों की हालत आम लोग ठीक नहीं कर सकते, लेकिन गाड़ी चलाते हुए ट्रैफिक नियमों का पालन खुद से करें…
कितना बदलाव आ गया है! दस-बीस वर्षों में मानो पूरी सदी बदल गई।
जीवन की बुनियादी और जरूरत की चीजों की तंगी और रोजमर्रा की महंगाई ने सभी को त्रस्त कर दिया है।
एक बार एक जिज्ञासु ने सुकरात से पूछा कि सामाजिक जीवन में निखार कैसे ला सकते हैं।
माता-पिता के गुण बच्चों में आते हैं, पर यह सत्य भी उतना ही बड़ा है कि गुणी लोग किसी खास…
गीता में कहा गया है, दुखदायी और सुखदायी परिस्थितियों का आना कर्मजन्य है।
प्रकृति त्याग और तपस्या का अनुपम पाठ है। हमेशा अपने मन की नहीं, कुछ दूसरों के मन की हो, वही…
सदियों पहले जब वर्तमान शिक्षा प्रणाली नहीं थी, तब भी गुरुकुलों में परीक्षा देनी पड़ती थी।
हमारी कृषि आधारित समृद्धि खैबर और हिंदूकुश दर्रों से उतर कर आने वाले आक्रांताओं के पैरों तले बार-बार रौंदी गई।