प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों कई दिग्गज नेताओं की अपने कैबिनेट से छुट्टी कर दी और कई नए चेहरों को जगह दी थी। इनमें कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया भी शामिल हैं। मंत्रिमंडल में शामिल करने के बाद उन्हें नागरिक उड्डयन जैसा भारी-भरकम और अहम मंत्रालय दिया गया है।
कांग्रेस की युवा ब्रिगेड के चर्चित चेहरों में शुमार सिंधिया जब भाजपा में शामिल हुए तो उन पर तमाम आरोप लगे। कांग्रेस के नेताओं की तरफ से उनपर गद्दारी का आरोप लगाया गया था। तब सिंधिया ने इसपर तीखा पलटवार किया था।
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था कि वादाखिलाफी के खिलाफ आवाज उठाना धर्म है। मेरी दादी ने भी यही किया था। ‘एमपी तक’ से बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि कांग्रेस बार-बार एक ही बात कहती है, गद्दार…। तब सिंधिया ने कहा था, ‘ इसका स्पष्ट उत्तर भी मैं देता हूं। अगर वादाखिलाफी कोई सरकार करे तो उस वादाखिलाफी के खिलाफ जमीन पर उतरना हमारा धर्म है। 1967 में मेरी दादी ने भी यही किया था।’
इसी इंटरव्यू में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने परिवार का बचाव करते हुए कहा था कि ‘सिंधिया परिवार ने कभी भी अपने आप के लिए, पद के लिए और कुर्सी के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। आप मेरा, मेरे पूज्य पिताजी और दादी का उदाहरण देख सकते हैं।’ उन्होंने आगे कहा था कि गद्दारी तो कमलनाथ और दिग्विजय सिंह ने की है। यह मेरी अंतरात्मा कहती है।
आपको बता दें कि कांग्रेस छोड़ने के बाद से ही तमाम नेता सिंधिया पर हमलावर हैं। पिछले दिनों एक कार्यक्रम में खुद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने सिंधिया पर निशाना साधा था। एक कार्यक्रम में राहुल ने ज्योतिरादित्य सिंधिया का उदाहरण देते हुए कहा था कि जो लोग डरते हैं उन्होंने पार्टी छोड़ दी। उन्हें तो अपना घर बचाना था, इसलिए डर गए और आरएसएस में शामिल हो गए।

