रोजाना की वॉक केवल शरीर को फिट रखने का जरिया नहीं है, बल्कि यह आपके मस्तिष्क के लिए एक ‘सुपरफूड’ की तरह काम करती है। वॉक एक ऐसी एक्सरसाइज है जो आप दिन भर में अपनी सुविधा के हिसाब से कभी भी कर सकते हैं। अक्सर लोग वॉक को साधारण एक्सरसाइज समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन आप जानते हैं कि रोज़मर्रा की ये गतिविधि शरीर पर चुपचाप बेहद शक्तिशाली प्रभाव डालती है। नियमित रूप से आधे घंटे की वॉक शरीर की चर्बी घटाने में मदद करती है। रोजाना वॉक करने से कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल रहता है और दिल की सेहत में सुधार होता है। डायबिटीज मरीज रोज वॉक करें तो आसानी से बिना दवा के भी ब्लड शुगर के स्तर को नॉर्मल कर सकते हैं।

जामा इंटरनल मेडिसिन (JAMA Internal Medicine) और नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट (NCI) की मार्च 2020 और सितंबर 2021 में की गई रिसर्च के मुताबिक रोजाना लगभग 7,000 से 10,000 कदम चलने से समय से पहले होने वाली मृत्यु का जोखिम 50% से 70% तक कम हो जाता है। ये रिसर्च 40 से 60 साल के लोगों पर 10 साल तक किया गया था। रिसर्च के मुताबिक रोजाना वॉक करने से टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, स्ट्रोक और यहां तक कि कुछ प्रकार के कैंसर का खतरे भी काफी हद तक कम होता है।

अपोलो हॉस्पिटल्स, हैदराबाद में न्यूरोलॉजिस्ट, डॉ. सुधीर कुमार (एमडी, डीएम) ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में बताया है कि रोज वॉक करने से बॉडी फिट रहती है, दिल की सेहत में सुधार होता है,बॉडी में विटामिन डी की कमी पूरी होती है और मानसिक सेहत में भी सुधार होता है। वॉक करना एक ऐसी एक्सरसाइज है जिसे रेगुलर किया जाए तो ब्रेन हेल्दी रहता है, दिल की सेहत में सुधार होता है, मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है और मानसिक सेहत में भी सुधार होता है।  आइए जानते हैं कि वॉक कैसे ब्रेन और बॉडी को हेल्दी रखने में मदद करती है।

वॉक करने से मानसिक सेहत में होता है सुधार

वॉक करने से ना सिर्फ बॉडी का फैट कम होता है बल्कि मानसिक स्थिति में भी सुधार होता है। न्यूरोलॉजिकल दृष्टि से बात करें तो वॉक करने से दिमाग की कार्यक्षमता और भावनात्मक संतुलन को बनाए रखने में मदद मिलती है।  व्यक्ति कहां, कैसे और किस गति से चलता है ये सभी चीज़ें मानसिक स्पष्टता, मूड कंट्रोल और दीर्घकालिक ब्रेन हेल्थ को सीधे प्रभावित करती हैं। चलना केवल शारीरिक गतिविधि नहीं, बल्कि नर्वस सिस्टम के लिए ये पोषण का काम करती है।

नेचर के बीच टहलना भी है दिमाग के लिए है जरूरी

पार्क, बगीचे या हरियाली के बीचो बीच हरे-भरे इलाकों में टहलने से मानसिक स्थिति बेहतर होती है। प्राकृतिक वातावरण तनाव को कंट्रोल करता है। हरियाली के संपर्क में रहने से स्ट्रेस हार्मोन कम होते हैं और नर्वस सिस्टम बैलेंस रहता है। रोज वॉक करने से दिल की सेहत में सुधार होता है। जब दिमाग प्राकृतिक माहौल में होता है, तो एकाग्रता और मानसिक लचीलापन भी बेहतर होता है। झील, नदी या तालाब के पास टहलना दिमाग को सुकून देता है। ऐसे वातावरण में मानसिक थकान कम होती है और भावनात्मक संतुलन बढ़ता हैं। कुदरती झरने और तालाब के आस पास का माहौल दिमाग पर शांत प्रभाव डालता है, जिससे मूड बेहतर होता है और गहरी तसल्ली का एहसास होता है।

वॉक करने से बॉडी को मिलता है विटामिन डी

दिन के उजाले में बाहर टहलने से बॉडी में नेचुरल तरीके से  विटामिन-D बनता है, जो हड्डियों को मजबूत करता है और मांसपेशियों की कार्यक्षमता में भी सुधार करता है। रोजाना की वॉक इम्यून सिस्टम को मजबूत करती है और दिमाग को हेल्दी रखती है। धूप शरीर की आंतरिक घड़ी यानी बॉडी क्लॉक को बैलेंस करती है जिससे नींद की गुणवत्ता सुधरती है। अच्छी नींद याददाश्त, भावनात्मक संतुलन और ब्रेन हेल्थ को सपोर्ट करती है। कई रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है कि नियमित रूप से दिन की रोशनी में रहना लंबी उम्र और कम मृत्यु दर से जुड़ा पाया गया है।

दोस्तों के साथ वॉक करना भी है ब्रेन की रेमेडी

दोस्तों या परिवार के साथ टहलने से इसमें सामाजिक जुड़ाव जुड़ जाता है, जो मानसिक सेहत में सुधार करता है। दोस्तों के साथ बातचीत करते हुए चलने से खुशी का अहसास होता है और आपसी जुड़ाव से जुड़े ब्रेन केमिकल्स एक्टिव होते हैं, जिससे डिप्रेशन और मानसिक गिरावट का खतरा कम होता है। बुज़ुर्गों में ग्रुप वॉकिंग से नियमितता बढ़ती है, संतुलन सुधरता है और गिरने की आशंका कम होती है।

डायबिटीज जैसी बीमारी का होता है इलाज

यूनिवर्सिटी ऑफ लिमरिक (University of Limerick), आयरलैंड में हुई रिसर्च के मुताबिक जो फरवरी 2022 में हुई है लाइट वॉकिंग ब्लड शुगर के स्तर को कंट्रोल करने में मददगार साबित होती है।  शोधकर्ताओं ने पाया कि भोजन के बाद केवल 2 से 5 मिनट की हल्की वॉक भी ब्लड शुगर और इंसुलिन के स्तर को काफी कम कर सकती है।

वॉक के साथ चलने की रफ्तार भी रखती है मायने

थोड़ी तेज़ चाल, जिसमें सांस तेज़ हो जाए लेकिन थकान न हो, दिमाग के लिए सबसे फायदेमंद मानी जाती है। मध्यम तीव्र वॉक से दिमाग तक रक्त प्रवाह बढ़ता है, नए न्यूरल कनेक्शन बनने में मदद मिलती है और योजना बनाने और फोकस जैसी क्षमताएं मजबूत होती हैं। ब्रिस्क वॉकिंग को स्ट्रोक और डिमेंशिया के कम जोखिम से जोड़ा गया है।

सही पॉश्चर के साथ चलना भी है जरूरी

वॉक करना जितना मायने रखता है उतना ही मायने वॉक करने का तरीका भी रखता है। सीधा खड़े होकर, हाथों की नेचुरल मूवमेंट के साथ चलना बैलेंस और चलने की क्षमता को बेहतर बनाता है। उम्र बढ़ने के साथ और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के खतरे वाले लोगों के लिए यह और भी ज़रूरी हो जाता है। सबसे अहम है रेगुलर्टी, यानी कभी-कभार ज़्यादा चलने से बेहतर है रोज़ थोड़ा-थोड़ा चला जाए। हफ्ते पर रोजाना सिर्फ आधा घंटा चलने से भी याददाश्त तेज होती है और मूड बेहतर रहता है। माइंडफुल वॉकिंग एकाग्रता और भावनात्मक नियंत्रण को बेहतर बनाती है।

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