कविताः ‘मैं खिलना चाहता हूं नीलकमल बन कर तुम्हारे चेहरे पर’ संजय स्वतंत्र की कविता By संजय स्वतंत्रOctober 29, 2018 06:06 IST
कविताः सदियों का सिलसिला है डूबने से पहले तुम्हारे माथे पर लाल बिंदिया बनकर सज जाना संजय स्वतंत्र की कविता By संजय स्वतंत्रOctober 18, 2018 08:05 IST
संजय स्वतंत्र की कविताः साक्षी हूं मैं आखिरकार.. संजय स्वतंत्र की कविता By संजय स्वतंत्रSeptember 5, 2018 07:23 IST
कविताः ‘नाउम्मीदी की गठरी को तुम मेरे पास ही छोड़ कर चली जाना’ संजय स्वतंत्र की कविता By संजय स्वतंत्रJuly 13, 2018 07:53 IST
मैं रचने लगा एक नई कविता फिर से, तुम्हारे लिए संजय स्वतंत्र की कविता By संजय स्वतंत्रJune 4, 2018 06:48 IST
कविताः मैं वहीं बैठा मिलूंगा उम्मीदों की नाव पर संजय स्वतंत्र की कविता By संजय स्वतंत्रMay 28, 2018 07:10 IST
कविताएंः ‘नारी के तीन चित्र’ और ‘प्रेयसी का मैला आंचल’ संजय स्वतंत्र की कविताएं By संजय स्वतंत्रApril 16, 2018 12:51 IST
काव्य चर्चाः कह देने और न कह पाने की जद्दोजहद का नतीजा है- ‘मन के मंजीरे’ काव्य संग्रह मन के मंजीरे में प्रेम को सहेजने का भी भाव है। यहां नायिका की आत्मा के होंठों पर… By संजय स्वतंत्रApril 16, 2018 12:39 IST
कविताः ‘सुनो मित्र! तुम्हारे विजय रथ का सारथी हूं मैं’ संजय स्वतंत्र की कविता By संजय स्वतंत्रMarch 29, 2018 13:11 IST
India-EU FTA: ट्रंप को लगेगा झटका! भारत-यूरोप ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ के बेहद करीब, यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष ने की घोषणा
‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ से पहले इस शो में साथ नजर आए थे ‘जेठालाल’ और ‘बबीता’, IMDb पर मिली है 7.8 रेटिंग