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संजय स्वतंत्र के सभी पोस्ट

कविताः लव का लैम्पपोस्ट

संजय स्वतंत्र की कविता

कविताः उठो, कि सुबह हो गई है

संजय स्वतंत्र की कविता

कविताः तपती दुपहरी में गुलमोहर तुम

संजय स्वतंत्र की कविता

काव्य चर्चाः कह देने और न कह पाने की जद्दोजहद का नतीजा है- ‘मन के मंजीरे’

काव्य संग्रह मन के मंजीरे में प्रेम को सहेजने का भी भाव है। यहां नायिका की आत्मा के होंठों पर प्रेम के पहले चुंबन...

कल्पनाओं के हकीकत बनने और हकीकत के कल्पनाओं से आगे न बढ़ पाने की कहानी – ‘सोफिया आ रही है’

क्या ही अच्छा हो कि रोबोट में अभी से मानवीय संवेदनाएं विकसित कर दी जाए, जो कि अभी इंसानों में खत्म हो रही हैं।

Propose Day 2018: एक कहानी आदिम प्यार की

Propose Day 2018: वैलेंटाइन वीक पर मगन होने वाली नई पीढ़ी के लिए स्त्री-पुरुष के बीच प्रणय की एक कहानी। यह कहानी उन युवाओं...

कविताः तो लौट जाऊंगा सिद्धार्थ बनकर अपनी यशोधरा के पास, हमेशा के लिए

पढ़िए संजय स्वतंत्र की कविता - 'अगर पढ़ सको मेरी अर्जियां'

कविताः ‘मैं उजाला बन कर बिखरता रहूंगा, शुभकामनाओं के साथ बार-बार’

तुम्हारी पलकों के नीचे/ जहां रोज बैठ कर/ संवाद करता हूं/ वहां भर उठी है/ एक खारी नदी

कविताः स्मृतियों की जल समाधि पर सिंडेरिया का पूछना – ‘लिखो न एक कविता मेरे लिए’

तुमने कहा था/ मुझे लिखनी चाहिए कविता/ लिखता था कभी/ अब साथ नहीं देती कलम।