
सत्रीय नृत्य सिर्फ नृत्य नहीं है, यह संपूर्ण जीवन शैली है और इसमें चौसठ कलाओं के अंश समाहित हैं। यह…

सत्रीय नृत्य सिर्फ नृत्य नहीं है, यह संपूर्ण जीवन शैली है और इसमें चौसठ कलाओं के अंश समाहित हैं। यह…


रंगमंच के सामने तेजी से बढ़ते तकनीकी माध्यमों और अन्य मनोरंजन कला माध्यमों के समक्ष अपने स्वंतत्र और वैचारिक अस्तित्व…

रंगमंच को जीवन का एक अनिवार्य अंग माना जाता है। मगर इसके साथ ही यह भी कहा जाता रहा है…

यह सौगात तो स्कूलों-कॉलेजों से ही शुरू हो जाती है, जिन्हें कभी शिक्षा मंदिर कहा जाता था। वे आज बिना…

यह महिला सशक्तीकरण का दौर है। शारीरिक संरचना और बल में वह पुरुषों से बेशक कमतर हो, लेकिन मानसिक धरातल…

स्त्री सशक्तीकरण को लेकर लंबे समय से बहस चल रही है। इसके लिए अनेक अभियान, जन-जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए गए।…

हमारी विरासत खोए हुए बसंत की पीड़ा को चैता में गाने की विरासत रही है। मगर अब तो हम अपनी…

शताब्दी समारोह के अगले चरण में नृत्यांगना नंदिनी रमणी और साथी नृत्यांगनाओं ने नृत्य रचनाओं को पेश किया, जिसे टी…

शालीमार बाग के बगल में शाह हुसैन की मजार है, जहां ‘मेला चरागां’ मनाया जाता है। यह एक दिलचस्प बात…

गैर-दलितों को यह बात समझने की जरूरत है कि उनके दुख-सुख के सच्चे साथी दलित ही हैं। राजनेता अपने स्वार्थों…

राजे-रजवाड़े चले गए। पर लोकतंत्र जो पहले समाज परिवर्तन की इच्छा से उभरा था, धीरे-धीरे एक नए प्रकार के सामंतवाद…