सैम अंकल! आप बीस साल तक उनको ‘बीनते’ रहे, लेकिन अंतत: तालिबान, अलकायदा, आइएसआइएस, हक्कानी और पाकिस्तानी सबने मिल कर…
भय का राज अफगानिस्तान की जीवन-शैली बन चुका है। अपने हों या पराए, दोनों से उसका रिश्ता डर की नींव…
दशकों से आम लोगों को बताया गया है कि अगर उनके जीवन में समृद्धि की छोटी-सी किरण भी दिखने लगी…
जिस ढंग से मोदी सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को पेश किया है, उससे इसमें साजिश की बू आती है।…
विवेकानंद और गांधी दोनों ने हिंदू धर्म को भाग्यवाद, कर्मकांड या संप्रदायवाद से मुक्त रूप में स्वीकार किया और यह…
कुछ चैनल बताते हैं कि तालिबान सबको ‘माफ’ कर रहे हैं ‘सबकी हिफाजत’ करने की बात कह रहे हैं! लेकिन…
कैसे भुला सकती हूं मैं कि जब बामियान की प्राचीन, आलीशान बुद्ध की प्रतिमाओं को तालिबान सरकार ने उड़ा दिया…
लालकिले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस के संबोधन की महत्ता जवाहरलाल नेहरू के वक्त से रही है। मैं इसे राष्ट्र…
बुधवार को जिस तरह का ठोकतंत्र राज्यसभा में दिखा, वह शायद लोकतंत्र का अंतिम क्षण था! ऐसे ‘लड़ाकू दृश्य’ लोकसभा…
वास्तव में नाले ऐसे विशेष प्राणी हैं, जो बरसात को घर के अंदर सम्मानजनक प्रवेश दिलाते हैं, घर के सामान…
अर्थव्यवस्था पर मंदी ऐसी छाई हुई है कि विशेषज्ञ मानते हैं कि 2022 तक छाए रहेंगे ये बादल। इतने लोग…
सरकार वैश्विक अर्थव्यवस्था की चाल को समझ पाने में नाकाम रही है। साथ ही निचले तबके की सामाजिक-आर्थिक पीड़ा को…