कुछ कलाकारों का कहना है कि हंसना-हंसाना एक कला भी है और तजुर्बा भी।
हम सच को जानते हुए भी अगर अंधविश्वासी बन जाएं तो वह खतरनाक है।
आपने सुना होगा- किसी के दिल तक पहुंचने का एक रास्ता पेट से भी जाता है। आपका बनाया भोजन खाकर…
आजकल देखें, तो सड़कों के किनारे फलों के पेड़ नहीं दिखाई देते।
सहज ढंग से खरी बात कहने का भारतीय अंदाज इसे तिकोना कहकर किसी शक की गुंजाइश नहीं छोड़ता।
उन्मुक्तता के प्रतीक पक्षी जब हमारे घर-आंगन या आजकल की बालकनी में चहकते-फुदकते हैं तो उन्हें देखने मात्र से ही…
भारतीय संस्कृति और विरासत में ऊंटों का व्यापारिक, सामरिक और प्रशासनिक अनुशीलन होता रहा है।
कहना तो यह चाहिए कि जितना ज्यादा हम भावनाओं को दबाएंगे, उतने ही अव्यावहारिक होते चले जाएंगे। भावनाओं के कंधों…
किसी के घर जाना होता है, तो मेरे लिए दो घंटे काटना भी मुश्किल हो जाता है।
कभी जगजीत गाया करते थे- ‘जो बेहोश है, होश में आएगा, गिरने वाला जो है वह संभल जाएगा’।
आखिर कौन-सी वे गिरहें हैं, जिन्हें हमें समझने, सुलझाने और तोड़ने का अनवरत प्रयास करते रहना है।