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क्षमा शर्मा के सभी पोस्ट

दुनिया मेरे आगे- लाचार तीमारदार

अस्पतालों को सोचना चाहिए कि मरीज की देखभाल करने वालों का स्वस्थ रहना भी उतना ही जरूरी है, वरना वे कैसे अपने किसी बीमार...

झूठ और सच के बीच

कसर हम अपने बच्चों को सिखाते हैं कि वे हमेशा सच बोलें, झूठ बोलना बुरी बात है। अच्छे बच्चे वे होते हैं, जो कभी...

दुनिया मेरे आगेः ठगी के चेहरे

करीब दो महीने पहले की बात है। दोपहर का समय था। मैं पति के साथ बैठी थी। उनके पास एक फोन आया, जिसमें उधर...

भाषा- सिकुड़ती मातृभाषाएं

जब तक लोगों के पास पैसा नहीं आता, वे मलयालम माध्यम के स्कूलों में बच्चों को पढ़ाते हैं, लेकिन जैसे ही पैसा आता है,...

आधी दुनिया- उद्यमशीलता से कामयाबी

हमारे एक मित्र राजेश कालिया कोट्टयम (केरल) में रहते हैं। कुछ साल पहले जब वे दिल्ली आए तो उनसे मिलने गई थी। पत्रकार मित्र...

स्त्री विमर्श के अंतर्विरोध

स्त्री विमर्श की वह छतरी, जिसके बारे में धारणा थी कि वह सभी स्त्रियों के समान अधिकार और आरक्षण दे सकती है, उसमें पिछड़े...

लाइलाज शक: जान गंवाती औरतें

अपने समाज में मारपीट और घरेलू हिंसा का बड़ा कारण शक को ही माना जाता है। खैर, उस लड़की का अब दूसरा विवाह हो...

सेवानिवृत्ति के बाद

अट्ठावन साल पर रिटायरमेंट क्या हुआ, सलाह देने वालों की बाढ़ आ गई। किसी ने कहा- अब तो आप बेटे के पास जाकर अपने...

राजनीतिः वाजिब हक बनाम खोखली चिंताएं

अकसर गरीबों और दलितों की चिंता में दुबले हुए जाते नेताओं की चिंताएं कितनी व्यर्थ हैं कि शहर भर का कूड़ा उठाने वाले और...

समाज-छरहरेपन की सनक

एक निजी प्रकाशक ने बारहवीं कक्षा के लिए हेल्थ ऐंड फिजीकल एजूकेशन से संबंधित पुस्तक में महिला के शरीर को 36-24-36 के मानकों पर...

फैशन, व्यंजन और मनोरंजन का मायाजाल

उदारीकरण के साथ ही भारत में फैशन, व्यंजन और मनोरंजन के क्षेत्र में भारी मात्रा में निवेश हुआ है। मध्यवर्गीय जीवन शैली पर भी...

दुनिया मेरे आगे: दबे छिपे सपने

हाल ही में आजमगढ़ जाना हुआ था। शहर के नाम से भी पहचाने जाने वाले कैफ़ी आजमी और उनकी बेटी शबाना आजमी को कौन...

प्रसंग: बच्चे का कमरा

कुछ साल पहले स्विटजरलैंड गई थी। तब बेटे के दोस्त के घर जाना हुआ। उसकी बच्ची का जन्म कुछ दिन पहले ही हुआ था।

स्त्री-चिंतन: सहमति और संबंध

पिछले कुछ समय से देखा जा रहा है कि स्त्रीमुक्ति का एकमात्र मुद्दा सेक्स बना दिया गया है।

दुनिया मेरे आगे: निशाने पर निर्बल

आजकल मनुष्य को शर्मिंदा करने के लिए समाज में ऐसे मानक बनाए जा रहे हैं जिनका इंसानियत से दूर-दूर का कोई वास्ता नहीं।

‘दुनिया मेरे आगे’ कॉलम में क्षमा शर्मा का लेख : परंपरा में प्रकृति

अगर किसी ने बांस के वृक्षों को देखा हो तो उन्हें पता होगा कि वे कितने लंबे-चौड़े होते हैं। इन्हें दुनिया की सबसे बड़ी...

स्त्री विमर्शः पचास हजार औरतों की आवाज

सबसे ज्यादा अफसोस यह देख कर होता है कि इस देश के जनसेवक, जिन्हें राजनेता कहा जाता है, ऐसे मसलों पर अकसर चुप्पी साध...

मजबूरी बनाम मुनाफा

आज चारों ओर पानी के लिए इतना हाहाकार है। पानी की गाड़ियां चलाई जा रही हैं। कुओं में पानी भरा जा रहा है। फिर...