Democracy, Ravivari, Rakesh Sinha Blog
Blog: विविधता की राजनीतिक संस्कृति और सामाजिक जीवन में योद्धा की छवि, चुनौतियों के बीच आलोचना में समाधान तलाशने की कोशिश

भारतीय जनतंत्र की स्थिति दुनिया के अन्य हिस्सों, चाहे यूरोप हो या अफ्रीका, भिन्न है। इसका कारण विविधता आधारित जीवन…

Women Reservation, women in Parliament, inter parliamentary union,
लोकतंत्र में सबसे ऊपर लोकहित, समानता, समता और समरसता के लिए सजग और सतर्क मतदाता जरूरी

यह राष्ट्र की शिक्षा व्यवस्था का ही नहीं, चयनित प्रतिनिधियों का भी उत्तरदायित्व है कि वे संविधान की मूल भावना…

lok sabha elections 2024, Congress leader Randeep Surjewala,
संपादकीय: लोकतंत्र में राजनेता और मर्यादा, अवांछित बयानों और शब्दों से गिर रही है राजनीति की गरिमा

लोकतंत्र में सहमति-असहमति एक जरूरी प्रक्रिया है। मगर इस क्रम में कोई भी नेता अगर किसी के खिलाफ अभद्र और…

Expression| freedom
Jansatta Editorial: लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आजादी के साथ विमर्श करने की जरूरत

देश के संविधान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बतौर अधिकार दर्ज है, तो दूसरी ओर अपनी सुविधा के मुताबिक उसकी मनमानी…

Sudheesh Pachauri's articles, Sudheesh Pachauri's news, Sudheesh Pachauri's satire
सुधीश पचौरी का कॉलम बाखबर: जनतंत्र का प्रसाद, चुनाव और चैनल में फंसा दर्शक और वोटर

एक चैनल बांड के लाभार्थी दलों के बारे में बताता रहा कि सबसे अधिक भाजपा को मिला। नंबर दो पर…

Pandit Nehru| parliament
भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और संसदीय जनतंत्र

डाॅ श्यामा प्रसाद मुखर्जी को नेहरू-लियाकत समझौते के विरुद्ध आवाज उठाने के कारण मंत्रिपद से हाथ धोना पड़ा था। यह…

New Parliament| debate
Jansatta Editorial: राजनीति के पथ पर धूमिल पड़ते जा रहे संसदीय परंपरा के मानक

सांसदों का व्यवहार तो ऐसा होना चाहिए, जिससे संसद की गरिमा बढ़े और आम लोगों पर उसका सकारात्मक असर हो।

Supreme Court | ED| PMLA
सुप्रीम कोर्ट को चुनाव में दखल देने का पूरा हक, जानिए जस्टिस क्यों बोले- हम आंखें बंद करके तो नहीं बैठ सकते

जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की बेंच ने कहा कि अगर कोई अफसर गलत करता दिखता है तो कोर्ट…

Democracy | Public
स्वायत्तता का निर्वाह वही कर सकता है, जो स्वच्छंदता को उसका पर्याय न मान बैठा हो

सम्मानपूर्ण मानवीय जीवन के नैसर्गिक अधिकार को समझने में सभ्यताओं को कितनी ही शहस्त्राब्दियां लगी होंगी, इसका अनुमान प्रत्येक सजग…

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