विकेश कुमार बडोला मानव सृष्टि का सबसे ज्ञानी जीव है, ऐसा अब तक कहा जाता रहा है। लेकिन अब अगर…
अतिशयोक्तिपूर्ण बातें करना, सुनना, उनमें रस लेना और एक हद तक उनमें भरोसा करना लोक जीवन का अंग है। धार्मिक…
समाचारों से ज्ञात हुआ कि अमित शाहजी दिल्ली की हार से इतने दुखी हुए कि इसका प्रभाव उन्होंने अपने बेटे…
चांद खां रहमानी अपूर्वानंद ने ‘ओबामा का गांधी-स्मरण’ (8 फरवरी) में बहुत साहसिक ढंग से सारगर्भित बात कही है। ‘घृणा…
सुधीर चंद्र आज खुशी का दिन है। जीत का दिन। अब तक की जिल्लत और बेचारगी को भुला, अच्छे दिन…
सय्यद मुबीन ज़ेहरा लोगों ने बहुत सोच-समझ कर एक ऐसी पार्टी को सरकार चलाने की जिम्मेदारी सौंपी है, जो दिल्ली…
तरुण विजय घृणा, विद्वेष और घनीभूत ईर्ष्या के बिना क्या राजनीति हो सकती है? उत्तर प्रदेश में जब पचास के…
सत्तारूढ़ पार्टी के विधायक दल के नेतृत्व में बदलाव कोई नई बात नहीं है। कांग्रेस ने ऐसा बहुत बार किया…
धर्मेंद्रपाल सिंह दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान फिर महसूस हुआ कि हमारे कानूनों में कितनी खामियां हैं। निर्वाचन आयोग ने…
निरंजन देव शर्मा बचपन कुल्लू में बीता। उन दिनों ठीक-ठाक बर्फ गिरती थी। उसके बाद पिछले सोलह वर्षों से कुल्लू…
आतिफ रब्बानी पिछले दिनों महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में पचहत्तर साल के एक किसान के खुद को चिता में जलाने…