संजीव चंदन पिछले दिनों आंबेडकर की विरासत पर कब्जे के लिए भारतीय जनता पार्टी कुछ उतावली दिखी। लोकसभा चुनावों के…
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जसविंदर सिंह जो समाज अपने सोच की खिड़कियां बंद कर लेता है, वह न तो स्वस्थ समाज हो सकता है…
कुलदीप कुमार पेरिस में व्यंग्य पत्रिका ‘शार्ली एब्दो’ पर हुए आतंकी हमले के बाद हिंदुत्व की प्रयोगशाला चलाने वालों को…
अपूर्वानंद जनवरी में सवाल किया जाना चाहिए कि आखिर हम किस गांधी को याद करना चाहते हैं। या कि उन्हें…
प्रभु जोशी यह अत्यंत विचारणीय तथ्य है कि भारत के अलावा दुनिया के किसी भी देश में ऐसा दुर्भाग्यपूर्ण उदाहरण…
राजकुमार केंद्र सरकार हो या राज्य सरकारें, अब उनकी निगाह में शिक्षा का उद्देश्य आर्थिक और सामाजिक विकास करना है।…
कुमार अंबुज किसी भी समस्या के निदान के लिए समन्वयवादी तरीका एक आसान रास्ता है, पर वह कितना सही है,…
विनीत कुमार वीरेंद्र यादव के लेख ‘पार्टनर, तुम्हारी पालिटिक्स क्या है’ (21 दिसंबर) पर बात करने से पहले उन्हें औपचारिक…
सय्यद मुबीन ज़ेहरा नए वर्ष के आगमन पर सबने थोड़ा-बहुत जश्न मनाया होगा। उसके बाद घर का कूड़ेदान कुछ अधिक…
तरुण विजय सिर्फ मैं श्रेष्ठ और बाकी सब मेरा अनुसरण करें, यह दंभ बहुत घातक होता है। अगर भारत केवल…
अशोक वाजपेयी जाहिर है कि ये बातें हाशिये से कही जा रही हैं: लगभग हमेशा की तरह साहित्य और कलाएं…
गोपेश्वर सिंह रमेशचंद्र शाह को साहित्य अकादेमी पुरस्कार मिला तो हिंदी की आभासी दुनिया में हंगामा हो गया। बधाइयां कम…