एक सामान्य वयस्क व्यक्ति का ब्लड प्रेशर 120/80 mmHg माना जाता है। इसमें ऊपर वाला अंक सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर कहलाता है, जो यह बताता है कि दिल के पंप करने पर रक्त नलिकाओं में कितना दबाव बन रहा है। वहीं नीचे वाला अंक डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर होता है, जो दिल के आराम की स्थिति में दबाव को दर्शाता है।
अगर ब्लड प्रेशर 120/80 से कम हो तो उसे लो ब्लड प्रेशर कहा जाता है और इससे ज़्यादा होने पर हाई ब्लड प्रेशर या हाइपरटेंशन माना जाता है। हाई बीपी को अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण शुरुआत में साफ़ नज़र नहीं आते। लंबे समय तक अनकंट्रोल्ड हाई ब्लड प्रेशर रहने से हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी डैमेज और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखने के लिए डाइट में नमक की मात्रा कम करना, तले-भुने और ऑयली फूड से परहेज करना, हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना और शरीर को एक्टिव रखना बेहद ज़रूरी है। इसके साथ ही शरीर में कुछ ज़रूरी पोषक तत्वों की भूमिका भी अहम होती है जिनमें जिंक शामिल है। verywell health में छपी खबर के मुताबिक जिंक एक जरूरी मिनरल है, जो शरीर की सैकड़ों प्रक्रियाओं में शामिल होता है। ये इम्युनिटी को बूस्ट करता है, घाव जल्दी भरता है,डीएनए रिपेयर करता है और हार्मोन के कामकाज में अहम भूमिका निभाता है। इसके अलावा जिंक ब्लड वेसल्स को हेल्दी रखने में भी मदद करता है। आइए रिसर्च से जानते हैं कि जिंक कैसे बीपी को नॉर्मल रखने में अहम किरदार निभाता है।
जिंक कैसे बीपी को नॉर्मल रखने में मदद करता है?
रजिस्टर्ड डायटीशियन और हेल्थ राइटर मॉर्गन पीयरसन जिन्हें न्यूट्रिशन, मेंटल हेल्थ और फिटनेस के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल है। मॉर्गन एविडेंस बेस्ड हेल्थ कंटेंट तैयार करती हैं, उन्होंने बताया जिंक ब्लड प्रेशर को प्रभावित करने का एक तरीका है। ये रक्त नलिकाओं को ढीला या टाइट होने में मदद करता है। जिंक कुछ एंजाइम और सिग्नलिंग सिस्टम के साथ मिलकर नाइट्रिक ऑक्साइड के उत्पादन को प्रभावित करता है। नाइट्रिक ऑक्साइड एक ऐसा तत्व है, जो ब्लड वेसल्स को फैलाने में मदद करता है। जब नलिकाएं रिलैक्स होती हैं, तो ब्लड प्रेशर कम होने में मदद मिल सकती है।
जिंक में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और लंबे समय तक रहने वाली सूजन ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे वो सख्त हो जाती हैं और ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। जिंक का सेवन नसों को होने वाले इस नुकसान से बचाव करता है। एक्सपर्ट ने रिपोर्ट में बताया जिंक बीपी की दवा नहीं। इसका असर हल्का होता है और यह व्यक्ति के पोषण स्तर पर निर्भर करता है।
जिंक और बीपी के कनेक्शन पर क्या कहती है रिसर्च?
जिंक और ब्लड प्रेशर पर हुई रिसर्च के नतीजे मिले-जुले हैं। कुछ स्टडीज़ में जिंक का सेवन करने से बॉडी को फायदा मिलता है, तो कुछ में खास असर नहीं दिखता। जिन लोगों की बॉडी में जिंक की कमी होती है, उनमें ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। कुछ छोटे क्लिनिकल ट्रायल्स में पाया गया कि जिन लोगों में जिंक की कमी थी या जिन्हें टाइप-2 डायबिटीज़ या मोटापा था, उनमें जिंक सप्लीमेंट लेने से सिस्टोलिक और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर में हल्की कमी आई। जिंक की कमी दूर होने से ब्लड वेसल्स बेहतर तरीके से काम करने लगती हैं और सूजन भी कम होती है।
हेल्दी लोगों में असर सीमित
जिन लोगों में जिंक का स्तर पहले से सामान्य था और कोई मेटाबॉलिक समस्या नहीं थी, उनमें जिंक सप्लीमेंट लेने से ब्लड प्रेशर पर कोई खास असर नहीं दिखा। इससे पता चलता है कि जिंक का फायदा उन्हीं लोगों को ज़्यादा हो सकता है, जिनमें इस मिनरल्स की कमी होती है। जिंक-रिच फूड्स लेने से दिल की सेहत बेहतर रहती है और ब्लड प्रेशर हेल्दी लेवल पर बना रह सकता है।
कितनी मात्रा में जिंक जरूरी है?
ब्लड प्रेशर कम करने के लिए जिंक की कोई तय मात्रा निर्धारित नहीं है। लेकिन रिसर्च में आमतौर पर 15 से 30 मिलीग्राम प्रतिदिन की मात्रा इस्तेमाल की गई है। ध्यान देने वाली बात यह है कि ज़्यादातर फायदे उन्हीं लोगों में दिखे, जिनमें पहले जिंक की कमी थी।
नॉर्मल हेल्दी इंसान के लिए रोजाना कितना जिंक की जरूरत होती है?
पुरुषों को – 11 mg प्रतिदिन
महिलाएं को- 8 mg प्रतिदिन
ज़्यादा मात्रा सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर ही लेनी चाहिए, खासकर जब जिंक की कमी का इलाज किया जा रहा हो।
जिंक से भरपूर फूड्स का करें सेवन
कद्दू के बीज जिंक का बेहतरीन स्रोत हैं। रोज़ 1–2 चम्मच भुने हुए कद्दू के बीज खाने से जिंक की कमी दूर करने में मदद मिलती है। तिल के बीज, चना और राजमा, मूंगफली और काजू, दूध और दही,अंडा, साबुत अनाज, मांसाहारी विकल्प जैसे चिकन, मछली और अंडा जिंक के बेहतरीन स्रोत हैं। खासकर रेड मीट में जिंक की मात्रा अधिक होती है।
जिंक से जुड़ी सावधानियां
- जिंक जरूरी है, लेकिन ज़्यादा लेना नुकसानदायक हो सकता है।
- ज्यादा जिंक लेने से मतली, पेट दर्द और दस्त हो सकते हैं।
- लंबे समय तक ज्यादा जिंक लेने से शरीर में कॉपर की कमी हो सकती है।
- जिंक कुछ एंटीबायोटिक और दूसरी दवाओं के असर को कम या बढ़ा सकता है।
डिस्क्लेमर
यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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