बढ़ता मोटापा आपके आलस का नतीजा है। बॉडी एक्टिविटी में कमी, खाने-पीने का ज्यादा शौक और आपका आलसीपन आपके शरीर को मोटा और भद्दा बना देता है। कुछ बीमारियां भी आपका मोटापा बढ़ा सकती हैं। बढ़ता मोटापा न देखने में खराब लगता है बल्कि आपकी बॉडी के जरूरी अंगों को भी नुकसान पहुंचाता है। बढ़ता मोटापा लिवर पर फैट जमा करता है, दिल की सेहत बिगाड़ता है और किडनी की सेहत को भी नुकसान पहुंचाता है।

अगर आप अपनी बॉडी को हेल्दी रखना चाहते हैं तो सबसे पहले शरीर को एक्टिव रखने की आदत डालें। बॉडी को एक्टिव रखने से ये मतलब नहीं है कि आप जिम में जाकर घंटों पसीना बहाएं। वजन कम करने के लिए जिम जाकर वेट लिफ्टिंग,प्लाटे या फिर भारी भरकम स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करने की जरूरत नहीं है। वजन कम करने के लिए और सेहत को दुरुस्त करने के लिए सबसे आसान, सुरक्षित और प्रभावी तरीका है रोज़ाना पैदल चलना। रोजाना वॉक करने से बॉडी एक्टिव रहती है,डायबिटीज, दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर और थायराइड जैसी बीमारियों से बचाव करना आसान होता है। अब सवाल ये उठता है कि पेट की चर्बी कम करने, ओवर ऑल मोटापा को कम करने के लिए कितनी देर वॉक करना जरूरी है।

वॉक करने से मोटापा कैसे कम होता है ?

अपोलो हॉस्पिटल, हैदराबाद के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर कुमार के मुताबिक रोज़ाना 30 मिनट की ब्रिस्क वॉक यानी तेज़ चाल से चलने से सेहत दुरुस्त रहती है और मोटापा कम होता है। एक्सपर्ट के मुताबिक आधे घंटे की नियमित वॉक वजन कम करती है, मोटापे का खतरा घटाती है और टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम भी कम करती है। सीके बिरला हॉस्पिटल, दिल्ली के फिजियोथेरेपी विभाग के एचओडी डॉ. सुरेंद्र पाल सिंह बताते हैं कि नियमित आधे घंटे की वॉक से वजन को संतुलित रखना आसान होता है। ब्रिस्क वॉक मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करती है जिससे फैट बर्निंग तेज़ होती है और वजन जल्दी घटता है।

वॉक करने से दिल रहता है हेल्दी

रोजाना वॉक करने से  हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक का खतरा टलता है। स्ट्रोक और कुछ प्रकार के कैंसर में भी वॉक करने से फायदा मिलता है। European Journal of Preventive Cardiology 2023 में प्रकाशित रिसर्च के मताबिक रोज़ाना केवल 3,967 कदम चलने से किसी भी कारण से होने वाली मृत्यु का जोखिम कम होने लगता है, और 2,337 कदम चलने से दिल के रोगों से होने वाली मौतों का खतरा टल सकता है। इस रिसर्च में 2,26,000 से अधिक लोगों के डेटा का विश्लेषण किया गया है।

हड्डियां होती है मजबूत

 रोज वॉक करने से हड्डियों और मांसपेशियों को आराम मिलता है। रोज़ाना वॉक करने से हड्डियां मजबूत होती हैं और मांसपेशियों की ताकत बनी रहती है। रोज वॉक करने से ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा टलता है। Journal of Bone and Mineral Research के मुताबिक शोधकर्ताओं ने पाया कि जो महिलाएं और पुरुष हफ्ते में कम से कम 4 घंटे पैदल चलते हैं, उनमें कूल्हे के फ्रैक्चर का जोखिम उन लोगों की तुलना में 40% कम हो जाता है जो कभी वॉक नहीं करते। रिसर्च के मुताबिक जब हम चलते हैं, तो हमारे पैरों की हड्डियों पर शरीर का भार पड़ता है। यह तनाव हड्डियों की कोशिकाओं (Osteoblasts) को नया बोन टिश्यू बनाने के लिए प्रेरित करता है।

दिमाग रहता है तेज़ और मूड होता है बेहतर

पैदल चलना सिर्फ शरीर ही नहीं, दिमाग के लिए भी फायदेमंद है। रोज़ाना 30 मिनट की वॉक से याददाश्त बेहतर होती है, तनाव और डिप्रेशन कम होता है। रोज वॉक करने से नींद की क्वालिटी सुधरती है और मानसिक थकान और एंग्ज़ायटी में राहत मिलती है। University of California (2024) की न्यूरोलॉजी रिपोर्ट के मुताबिक रोज़ाना 30-40 मिनट की वॉक करने से दिमाग के ‘हिप्पोकैम्पस’का आकार बढ़ता है। हिप्पोकैम्पस दिमाग का वो हिस्सा है जो याददाश्त और नई चीजें सीखने के लिए जिम्मेदार होता है। उम्र के साथ ये हिस्सा सिकुड़ने लगता है , लेकिन नियमित वॉकिंग इसे फिर से रीग्रो किया जा सकता है।

निष्कर्ष

अगर आपके पास समय कम है, तो भी 30 मिनट की रोज़ाना वॉक आपकी सेहत के लिए संजीवनी बूटी साबित हो सकती है। और अगर आप 45 मिनट तक चल पाते हैं, तो फायदे और भी बढ़ जाते हैं।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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