नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में तीन दिन की हिंंसा में करीब तीन दर्जन लोगों की जानें गई हैं। दंगाइयों ने बबर्रता की हद पार कर दी। 85 साल की बुजुर्ग महिला जिंदा जल गई, 19 साल के नौजवान के सिर में ड्रिल मशीन घुसेड़ दी गई, खुफिया ब्यूरो (आईबी) के कर्मचारी की क्षत-विक्षत लाश नाले से मिली। बर्बरता की इन कहानियों के बीच उम्मीद जगाने और इंसानियत को जिंंदा रखने वाली कुछ कहानियां भी सामने आईं। जानते हैं ऐसी ही कुछ कहानियां।
85 साल की अकबरी खजूरी-खास इलाके के गम्हरी विलेज एक्सटेंशन में रहती थीं। मंगलवार को अकबरी का बेटा मोहम्मद सईद सलमानी घर से दूध लेने के लिए बाहर निकला था। लेकिन इतनी ही देर में एक बौखलाई भीड़ उनके घर में घुस गई और फिर घर को आग के हवाले कर दिया। सलमानी की पत्नी-बच्चे तो भाग गए, पर चलने में तकलीफ के चलते बूढ़ी मां नहीं भाग सकीं और वह जिंदा जल गईंं। पढ़ें – सईद सलमानी की आपबीती
दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में 19 साल के विवेक चौधरी को जब गंभीर हालत में भर्ती कराया गया तब सभी दंग रह गए। दंगाइयों ने विवेक चौधरी के सिर में बायीं तरफ मोटर ड्रिल मशीन से छेद कर दिया था। विवेक चौधरी के साथ इस कदर बर्बरता हुई थी कि ड्रिल का एक हिस्सा उनके सिर में ही घुसा हुआ था। पढ़ें पूरी खबर
दिल्ली के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में हुई हिंसा के दौरान कई पत्रकारों को भी निशाना बनाया गया है। एक हिंदी समाचार पोर्टल के एक पत्रकार ने आरोप लगाया कि हिंसाग्रस्त क्षेत्र में वीडियो बनाते समय उनके साथ मारपीट की गई और खतना देखने के लिए उनकी पैंट उतारने के लिए मजबूर किया गया। पढ़ें पत्रकार की आपबीती
इस हिंसा में इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक कर्मचारी की भी मौत हो गई। इंटेलिजेंस ब्यूरो में कार्यरत अंकित गुप्ता का शव नाले में मिला था। अंकित गुप्ता के साथ भी भीड़ ने बर्बररता की सारी हदें पार कर दी थीं। कहा जा रहा है कि उनके शरीर पर धारदार हथियार से हमले के कई निशान थे और उन्हें गोली भी मार दी गई थी। AAP पार्षद ताहिर हुसैन पर इस हत्या का आरोप लग रहा है, पढ़ें ताहिर हुसैन की सफाई
मोहम्मद जुबैर की कहानी भी इंसानियत को शर्मसार करने वाली है। 24 फरवरी को जुबैर चांदपुर स्थित अपने घर से जब निकले तो भीड़ ने उन्हें पकड़ लिया। यह भीड़ उनपर लाठी और रॉड लेकर दानव दल की तरह टूट पड़ी। जुबैर को तब तक पीटा गया जब तक कि वो बेसुध ना हो गए। जुबैर पर इस भयानक हमले की तस्वीरें ‘रॉयटर्स’ के कैमरामैन के कैमरे में कैद हो गईं। मो. जुबैर की आपबीती पढिए
इंसानियत को शर्मसार करने वाली कहानियों के साथ ही इंसानियत को जिंंदा रखने वाली इन कहानियों को भी जानना चाहिए।
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उत्तर-पूर्वी दिल्ली के इंदिरा विहार मोहल्ले में जब हिंसा भड़की तब मंदिर को बचाने के लिए तीन मुसलमान उसकी पहरेदारी में बैठ गए। इतना ही नहीं इनलोगों ने इन लोगों ने भीड़ को रोकने के लिए दुकानों और मकानों के बोर्ड पर लिखे नाम तक बदल दिए। इस मुहल्ले में महज 8 हिंदू परिवार रहते हैं। स्थानीय मुस्लिम लोगों ने कहा है कि दीवाली हो या मुहर्रम, हम हमेशा साथ रहे हैं तो ऐसे में आज क्यों नहीं? मंदिर की पहरेदारी करने बैठे तीन मुसलमान
मानवता की मिसाल अशोक नगर में भी देखने को मिली। यहां हिंसा का मंसूबे लिए करीब एक हजार लोगों की भीड़ यहां दाखिल हुई। इन लोगों ने मस्जिद में आग लगा दी, मुसलमानों के घर जलाए और फिर दुकानों को भी निशाना बनाने लगे। लेकिन तब ही यहां रहने वाले हिंदू परिवारों ने मुसलमानों की मदद के लिए अपने घर के दरवाजे खोल दिए। मुसलमानों के लिए हिन्दू पड़ोसियों ने खोल दिए अपने घरों के दरवाजे
