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‘दूध लेने गया था, लौटा तो देखा 100-150 लोग गेट तोड़कर घर में घुसे थे, लगा दी थी आग, जिंदा जल गईं 85 साल की मां’, सईद सलमानी की आपबीती

दिल्ली हिंसा में अकबरी की ही तरह 27 लोगों की जान चली गई। कोई नवविवाहित था तो कोई व्यापारी। कोई बढ़ई था तो कोई कंस्ट्रक्शन मजदूर। कोई रोजी-रोटी के लिए घर से बाहर निकला था तो कोई बच्चे के लिए टॉफी लेने, मगर लौटकर कोई नहीं आया।

हिंसा में मरने वालों के परिवार बुधवार को जीटीबी अस्पताल के बाहर इंतजार करते हैं।(Express photo: Amit Mehra)

दिल्ली हिंसा में नफरत की आग इस कदर लोगों पर हावी थी कि दंगाइयों ने न तो बच्चे देखे, न बुजुर्ग, सभी को निशाना बनाया। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के खजूरी खास इलाके में गम्हरी विलेज एक्सटेंशन में दंगाइयों ने एक घर में घुसकर आग लगा दी, जिसमें 85 साल की बूढ़ी महिला अकबरी जिंदा जल गईं। अकबरी के बेटे मोहम्मद सईद सलमानी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “मंगलवार को मैं घर से बाहर दूध लेने निकला था। जब मैं वापस आया तो देखा कि 100-150 लोग मेरी गली में खड़े हैं। उन लोगों ने मेर घर का दरवाजा तोड़ दिया था और दो फ्लोर में आग लगा दी थी। मेरी पत्नी और बच्चे भागकर छत पर चले गए लेकिन मेरी 85 साल की मां नहीं निकल सकीं, उन्हें चलने-फिरने में दिक्कत थी।” सलमानी अपने घर में ही दो प्लोर पर गारमेंट का वर्कशॉप चलाते थे।

दिल्ली हिंसा में अकबरी की ही तरह 27 लोगों की जान चली गई। कोई नवविवाहित था तो कोई व्यापारी। कोई बढ़ई था तो कोई कंस्ट्रक्शन मजदूर। कोई रोजी-रोटी के लिए घर से बाहर निकला था तो कोई बच्चे के लिए टॉफी लेने, मगर लौटकर कोई नहीं आया। मुस्तफाबाद का रहने वाला अशफाक हुसैन (22) मंगलवार को काम से लौट रहा था, तभी गर्दन में दो बार वार किया गया। उसने पांच गोली लगने का भी सामना किया था लेकिन बाद में अल हिंद अस्पताल में उसकी मौत हो गई। अशफाक एक इलेक्ट्रीशियन था और उस रात काम से घर लौट रहा था। उसकी बीवी ने बताया कि हाल ही में 14 फरवरी को ही उसका निकाह हुआ था।
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17 साल का किशोर अमन दूध खरीदने के लिए बाहर गया था लेकिन जफराबाद मेट्रो स्टेशन के पास उसके चेहरे पर गोली मार दी गई। एक वकील ने अमन के परिवार को बताया कि दूसरी तरफ से की गई फायरिंग में गोली अमन के गाल को चीरती निकल गई।

19 साल के विवेक चौधरी जीटीबी अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग में भर्ती थे। दंगाइयों ने उसके सिर में बाईं तरफ ड्रिल मशीन घुसेड़ दी थी। विवेक के सिर में 1.5 इंच की ड्रिल घुसी हुई थी और उसकी स्थिति बेहद नाजुक थी। डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक सर्जरी की लेकिन उसकी मौत हो गई।

 (indian express photo)

अपने पिता की लाश लेने आए 25 साल के नितिन कुमार ने बताया कि जब वह ब्रह्मपुरी इलाके में दवा खरीदने गए था, तभी भीड़ ने उनपर हमला बोल दिया। सिर पर पट्टी बांधे और सूजी आंखों वाले नितिन ने इंडियन एक्सप्रेस से बताया, मैं अपने पिता के साथ बाइक पर दवा खरीदने गया था, तभी भीड़ ने उनपर हमला बोल दिया। दोनों पिता-पुत्र जमीन पर गिर पड़े और दंगाइयों ने बाइक में आग लगा दी। बाद में स्थानीय लोगों ने अस्पताल में भर्ती कराया।

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जीटीबी अस्पताल में मृतकों के तौर पर जिनकी पहचान हुई है उनमें दीपक कुमार (34); इशाक खान (24); मोहम्मद मुदस्सिर (30); वीर भान (50); मोहम्मद मुबारक हुसैन (28); शान मोहम्मद (35); परवेश (48); ज़ख़ीर (24); मेहताब (22); अशफ़ाक (22); राहुल सोलंकी (26); शाहिद (25); मोहम्मद फुरकान (30); राहुल ठाकुर (23); रतन लाल (42); अंकित शर्मा (26); दिलबर मोहसिन अली (24) और विनोद कुमार (50) शामिल हैं। लोक नायक अस्पताल में भी दो मौतें हुई हैं। वहां मृतकों की पहचान महरूफ अली (30) और अमन (17) के रूप में हुई है।
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