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Delhi Violence CAA Protest: मंदिर की पहरेदारी करने बैठे तीन मुसलमान, दंगाइयों को रोकने के लिए बदले दरवाजों पर लिखे नाम

Delhi Violence CAA Protest Updates: हिंसा भड़कने के बाद भीड़ से मंदिर को बचाने के लिए तीन मुसलमान उसकी पहरेदारी में बैठ गए और दंगाईयों को रोकने के लिए हिंदुओं की दुकानों और मकानों के बोर्ड पर लिखे नाम बदल दिए गए।

दिल्ली के कई इलाकों में लोग हिंसा की वजह से घर छोड़कर नए ठिकाने की तलाश में जा रहे हैं। (AP Photo)

Delhi Violence CAA Protest Maujpur, Gokulpuri, Bhajanpura, Jaffrabad, Chand Bagh Updates: दिल्ली हिंसा के बीच कई इलाकों से मानवता की मिसाल पेश करने और सांप्रदायिक सौहार्द को बनाए रखने वाली खबरें भी आ रही है। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के शिव विहार अंतर्गत पड़ने वाले इंदिरा विहार मोहल्ले में करीब 3200 घर हैं जिसमें महज आठ हिंदू परिवारों के हैं। हिंसा भड़कने के बाद भीड़ से मंदिर को बचाने के लिए तीन मुसलमान उसकी पहरेदारी में बैठ गए और दंगाईयों को रोकने के लिए दुकानों और मकानों के बोर्ड पर लिखे नाम बदल दिए गए। स्थानीय मुस्लिम लोगों ने कहा कि दीवाली हो या मुहर्रम, हम हमेशा एक-दूसरे के साथ रहे हैं। ऐसे में आज क्यों नहीं?

बुधवार को तीन मुसलमान इंदिरा विहार स्थित मंदिर के बाहर सुरक्षा के लिए खड़े हो गए। टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, एक व्यक्ति ने कहा, “हमें हमेशा से शांतिपूर्वक एक साथ रह रहे हैं। कोई भी धार्मिक स्थल क्षतिग्रस्त नहीं होना चाहिए।” इसी मंदिर के समीप एक हिंदू परिवार का मकान है। इस मकान के मुखिया अचार बेचने का काम करते हैं। घर में उनके साथ उनकी पत्नी और दो बच्चे रहते हैं।
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इस घर के दरवावे पर नीले कागज की पर्ची पर ‘परवेज अंसारी’ लिखे एक कागज को चिपका दिया गया है। वहीं एक दीवार को एक कपड़े से ढंक दिया गया है ताकि सरस्वती जी, हनुमान जी सहित अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियों को छिपाया जा सके।

यहां रहने वाले एक हिंदू व्यक्ति कहते हैं, “अपने आसपास की दो गलियों में रहने वाले लोगों की वजह से हम खुद को काफी सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। किसी बाहरी को इस गली में नहीं आने दिया जा रहा है। यदि कोई आ भी रहा है तो वे (स्थानीय मुसलमान) उन्हें हमारे घरों के नजदीक नहीं आने दे रहे हैं। हम ज्यादातर लोगों का नाम नहीं जानते हैं, लेकिन उन्हें चेहरे से जरूर पहचानते हैं।”

यहां के निवाली तसलीम अंसारी कहते हैं, “शिव विहार बाहरी लोगों की वजह से जल रहा है। यहां के स्थानीय लोग हिंसा में शामिल नहीं हैं। यहां के लोग एक परिवार की तरह रहते हैं। सभी का एक दूसरे के घर आना-जाना होता है। शादी हो या किसी की मौत, सभी एक दूसरे के सुख-दुख में शरीक होते हैं।

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