
Hindi kavita: सांत्वना श्रीकांत की दो कविताएं: 'पुरुष' और 'सपने में आते हैं पिता'

Hindi kavita: सांत्वना श्रीकांत की दो कविताएं: 'पुरुष' और 'सपने में आते हैं पिता'

साहित्य के इतिहास में यह शायद पहली बार है कि इतनी अधिक संख्या में रचनाकार एक साथ सक्रिय हैं और…

मौजूदा दौर में हिंदी साहित्य की मुख्यधारा में आंदोलनों की अनुपस्थिति का एक बड़ा कारण हिंदी समाज की जड़ों से…

कहते हैं, प्रतिभा कुछ तो अर्जित की जाती है और कुछ कुदरती होती है। तेरहवीं सदी के मशहूर शायर, दार्शनिक,…

यह कविता हमारे एक पाठक ने हमें भेजी है।

Propose Day 2018: वैलेंटाइन वीक पर मगन होने वाली नई पीढ़ी के लिए स्त्री-पुरुष के बीच प्रणय की एक कहानी।…


करणी सेना की धमकी के बाद सेंसर बोर्ड के चेयरमैन प्रसून जोशी ने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में शिरकत न करने…


पढ़िए संजय स्वतंत्र की कविता - 'अगर पढ़ सको मेरी अर्जियां'

समाज के स्याह पक्ष के दुष्प्रभावों से उपजने वाली पीड़ा को शब्दों से अभिव्यक्ति देना कवि-कर्म का सबसे जरूरी उत्तरदायित्व…

तुम्हारी पलकों के नीचे/ जहां रोज बैठ कर/ संवाद करता हूं/ वहां भर उठी है/ एक खारी नदी