अब ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की परिभाषा और वैश्विक गांव की भाषा का मूल आधार बदलने जा रहा है।
राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भों में किसी भी अभिमत पर हर एक की अपनी एक विशिष्ट अवधारणा होती है।
पिछले दिनों एक ऐसी दिलचस्प खबर आई थी, जिस पर सहसा विश्वास नहीं हुआ था।
अपनी स्मृतियों के कोष को टटोलते-संभालते रहना कई बार जरूरी होता है।
यह शायद सही ही कहा गया है कि बचपन को तोहफा नहीं, प्रोत्साहन देना चाहिए।
महात्मा बुद्ध का जीवन दर्शन और उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं।
इस संसार की हर एक वस्तु अलग-अलग होकर भी एक दूसरे से जुड़ी हुई है। सूर्य, चंद्रमा, पृथ्वी, तारे, प्रकृति-…
सच में बचपन से खूबसूरत और सलोना समय जीवन में दोबारा नहीं आता।
हमारे जीवन में रिश्ते बहुत महत्त्वपूर्ण होते हैं।
कल्पना कीजिए कि अगर पृथ्वी की गति अचानक बढ़ जाए या कम हो जाए, तो क्या होगा! हमारे रात-दिन का…
सूर्य सबसे अधिक सकारात्मक और सफल जीवन तत्त्व को दर्शाता है।
आत्म साक्षात्कार के लिए भी कथनी और करनी एक होना आवश्यक है, प्रभु प्राप्ति की राह में भी इसी का…