रोहित कौशिक

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27 Articles
Religion

सफलता का आधार है गलती

हम सब अपने जीवन में कई तरह की गलतियां करते हैं। गलतियां इतनी बुरी नहीं होती, जितनी हम उन्हें बना देते हैं।

Mental

अपनी गलती स्वीकार कीजिए

पिछले दिनों स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के एक शोध में यह बात सामने आई कि अपनी गलती स्वीकार करने वाले लोग जिंदगी में ज्यादा सफल होते...

jivan

जीवन जगत: जिंदगी को दोष न दें

जब हमें अपने उद्देश्य में सफलता प्राप्त नहीं होती तो जिंदगी अंधकारमय लगने लगती है

sahitya

जीवन-जगत: धारा में बहता जीवन

हमारी जिंदगी उस नाव की तरह है जो समय की धारा में अपने आप बहने लगती है। हम एक निश्चित दिशा में आगे बढ़ना...

knowledge

जीवन जगत: दिलों को जोड़िए, कुंठा को भगाइए

दरअसल जब किसी भी तरह की कोई कुंठा हमारे मन में घर कर लेती है तो हमारी मानसिकता भी संकुचित हो जाती है। कुंठित...

Health and well being

राजनीति: स्वास्थ्य क्षेत्र की खराब सेहत

भारत में डॉक्टरों की उपलब्धता की स्थिति वियतनाम और अल्जीरिया जैसे देशों से भी बदतर है। देश में इस समय लगभग साढ़े सात लाख...

जीवन-जगत: अपने दिल की खिड़की खोलिए

‘हमें लाभ हो’ के भाव को त्यागकर धीरे-धीरे हम सोचने लगते हैं कि ‘सिर्फ हमें ही लाभ हो’। जब हम स्वयं पर केंद्रित हो...

जीवन जगत: बेईमानी और ईमानदारी का अंतर्द्वंद्व

सवाल यह है कि हम ईमानदारी से बेईमानी की तरफ कैसे खिंचे चले आते हैं? समाज बेईमानी को एक बड़ी बुराई के रूप में...

जीवन जगत: मुश्किल नहीं ईमानदारी की राह

एक ईमानदार व्यक्ति को आप बेईमानी करने के लिए कहेंगे तो वह कतई नहीं करेगा। इसी तरह एक बेईमान व्यक्ति को आप ईमानदार रहने...

विशेष: विरोधाभास और जिंदगी

हम किसी भी सपने को गंभीरता से नहीं लेते हैं। सपने देखते समय हमारी भावनाएं हमारे ऊपर हावी होती हैं लेकिन सामने कोई लक्ष्य...

प्रसंग: दलित उत्पीड़न का सिलसिला

गैर-दलितों को यह बात समझने की जरूरत है कि उनके दुख-सुख के सच्चे साथी दलित ही हैं। राजनेता अपने स्वार्थों के मद्देनजर आपके जख्मों...

कैसे सुधरे पुलिस

पुलिस का काम कानून और व्यवस्था के तंत्र को सुधारना है न कि उसे बिगाड़ना। लेकिन पुलिस के संदिग्ध क्रियाकलापों से न केवल कानून...

राजनीतिः बढ़ती गरमी से संकट में धरती

पिछले अनेक वर्षों में जिस तरह से क्योटो प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ा़ई गई हैं, उसने भी हालात को और भयावह बना दिया है। विकसित...

विकास का दौर बदलते गांव

जब भी गांव की बात चलती है, तो एक सुकून भरे, शांत, सहज, सादगीपूर्ण वातावरण का आभास मन में उभर जाता है। हरे-भरे खेत,...

राजनीति: जीवों को बचा कर ही बचेगा जीवन

अंधाधुंध प्राकृतिक दोहन के फलस्वरूप बीते चालीस सालों में पशु-पक्षियों की संख्या घट कर एक तिहाई रह गई। पेड़-पौधों की अनेक प्रजातियां तो विलुप्त...

राजनीतिः वक्त की जरूरत है जल संग्रहण

समस्या यह है कि जल संग्रहण के प्रति आम लोग जागरूक नहीं हैं। लेकिन कुछ जगहों पर स्थानीय लोगों ने जल संग्रहण के सराहनीय...

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राजनीति: किताबों की सामाजिक पहुंच का सवाल

छोटे-छोटे शहरों में भी शॉपिंग कॉम्पलैक्स का निर्माण धड़ल्ले से हो रहा है। वहां महंगे-महंगे उत्पादों के शोरूम खुल रहे हैं लेकिन किताबों की...

राजनीतिः धर्म के नाम पर

धर्म के नाम पर जनमानस को भटकाने और ठगने की प्रक्रिया आज भी जारी है। आज हालत यह है कि धर्म के सहारे...

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