सच यही है कि फिर चप्पल हो या इंसान, सबको साथ चाहिए होता है। नाम दूसरों से मिला है, मान्यताएं,…
वर्तमान दौर की भागमभाग में मनोवैज्ञानिक सलाह देते हैं कि हम तनावहीन, शांतिपूर्ण जीवन जीएं।
मातृत्व की उसकी सहज प्रवृत्ति अपनी संतति पर जरा-से खतरे के आभास के साथ रौद्र रूप धारण कर लेती है।
बहुत पैसा इकट्ठा करके भी कुछ लोग कभी खर्च नहीं कर पाते और अंतत: उसे अपनी संततियों के उपयोग के…
आजकल लोगों में मुहब्बत कम और ईर्ष्या अधिक है। अगर कोई सक्षम नहीं है तो उसे ताने मारे जाते हैं…
कुछ समय पहले एक परिचित के वैवाहिक स्वागत समारोह में भाग लेने का अवसर मिला।
हम सांसारिक उलझनों में इस कदर उलझे रहते हैं कि सहजता और सुंदरता की अहमियत को समझ नहीं पाते। सुबह…
आज निहत्था अर्जुन अपने महाभारत के मैदानों को हवाई मीनारों में तब्दील होता देख रहा है।
वर्तमान समय में हमारी शिक्षा व्यवस्था ही अंकों पर प्रतिभा का मानक तैयार करने वाली प्रणाली बन गई है।
तारीफ केवल किसी को प्रसन्न करने की कला नहीं है, बल्कि ये विशुद्ध विज्ञान भी है।
हर कोई अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर कला के क्षेत्र में प्रवेश पाना चाहता है।