कर्मेंदु शिशिर भारतीय नवजागरण के ऐसे कई इलाके हैं, जिन पर हिंदी में काम नहीं हुए। ऐसे कई पक्ष और…
अर्पण कुमार श्रीप्रकाश शुक्ल तमाम समकालीन समस्याओं से दो चार होते हुए उन्हें कविता की संवेदनात्मक सघनता में बुनते हैं।…
इस ‘रामपाल कांड’ ने देश और उसके विचारवान लोगों के सामने कुछ सवाल खड़े कर दिए हैं। पहला सवाल राष्ट्र…
पिछले दिनों तथाकथित संत रामपाल के आश्रम में जो कुछ हुआ वह बहुत शर्मनाक है, इससे पहले आसाराम बापू और…
प्रफुल्ल कोलख्यान सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ समय पहले अपनी एक टिप्पणी में न्यायिक अति-सक्रियता से बचते हुए और कार्यपालिका की…
सदफ़ नाज़ प्यारी रेहाना जब्बारी! तुम्हारी मां ‘शोलेह’ के नाम तुम्हारा खत पढ़ा। तुम्हारी फांसी और उसके बाद इस खत…
विकास नारायण राय उन्नीस नवंबर की रात रामपाल की गिरफ्तारी से अनिश्चित त्रासद संभावनाओं वाले आश्रम प्रकरण के पटाक्षेप पर…
यह पहला मौका है जब सीबीआइ के शीर्षस्थ अधिकारी को किसी मामले की जांच से अलग रहने को सर्वोच्च न्यायालय…
यह विडंबना ही है कि एक ओर हम मंगल मिशन जैसे अंतरिक्ष अभियानों पर गर्व कर रहे हैं, दूसरी ओर…
उमाशंकर सिंह का ‘ध्यान भटकाने का मंत्र’ (4 अक्तूबर) और ब्रजेश कानूनगो का ‘सुनो कहानी’ (4 नवंबर), ये दोनों लेख…
बीरेंद्र सिंह रावत की टिप्पणी ‘आस्था की मुसीबत’ (समांतर, 7 नवंबर) पढ़ा। दिल्ली महानगर में लगता है कि आस्था जी…