
पूंजीवादी युग के साहित्यकार तगड़े तंत्र की जकड़बंदी में विक्षुब्ध। परिवर्तनेच्छा, क्रोध और अवशता की त्रयी क्षोभ का निर्माण करती…

पूंजीवादी युग के साहित्यकार तगड़े तंत्र की जकड़बंदी में विक्षुब्ध। परिवर्तनेच्छा, क्रोध और अवशता की त्रयी क्षोभ का निर्माण करती…

निरीह बकरे की तरह मिमिया-सा उठा सुधाकर लाल, ‘आप ही बताओ भाई नवल कि मैं क्या करूं? प्रबंधन ग्लोबल कंपनियों…

उनके काम के घंटे तय नहीं हैं, यह तय नहीं है कि उन्हें अपनी कमर पर कितने किलोग्राम वजन ढोना…


मेहमानों को बुलाने की जिम्मेदारी दादाजी ने अपने जिम्मे ले रखी थी। उन्होंने कह रखा था कि जन्मदिन पर वे…

कलमकारी भारत की करीब तीन हजार पुरानी कला है। शुरू में इसे मंदिरों में सजावट के तौर पर इस्तेमाल किया…

आधुनिकता के प्रभाव और नया रचने की होड़ में अगर सबसे अधिक नुकसान किसी चीज का हुआ है, तो हमारी…

अक्सर लोग नहाने पर उचित ध्यान नहीं देते। कई लोग जल्दी-जल्दी नहा कर काम निपटाते हैं, तो कई देर तक…

हमारे देश में पानी की समस्या दिनोंदिन गंभीर होती जा रही है। अगले दस सालों में देश व्यापक जल संकट…

1891 में गोर्की ने रूस की पहली बार पैदल यात्रा की, जिसका उद्देश्य था जनसाधारण को निकट से देखना। इस…


निकलते-निकलते पत्नी को आवाज दी: ‘हां वो गांव वाला लफड़ा तुम संभाल लेना, ऐसे भी मैं तुम्हारे रहते बिल्कुल निश्चिंत…