सुरेंद्र सिंघल

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के 40 फीसद उम्मीदवार महिलाओं को बनाए जाने की घोषणा से राजनीति में सक्रिय महिलाओं का हौसला बढ़ा है। प्रियंका ने यह घोषणा भी की है कि कांग्रेस चुनाव जीतने पर आधी आबादी यानी महिलाओं को सरकार में 33 फीसद आरक्षण देने का भी काम करेगी। प्रियंका यह वादा अपनी जगह है और जमीनी हकीकत इससे तालमेल खाती नहीं दिखती है। यूपी के 2017 के विधानसभा चुनाव में 38 महिलाएं ही विधायक चुनी गई थीं। इनमें 32 भाजपा की 2-2 कांग्रेस और बसपा की और एक-एक सपा और अपना दल की थी।

वैसे 70 साल में 18 बार विधानसभा चुनाव या उपचुनाव सहारनपुर जिले में हुए हैं। केवल छह महिलाएं ही विधानसभा पहुंचने में कामयाब हो पाई हैं। इनमें मायावती समेत चार दलित महिलाएं हैं और शशि बाला पुंडीर, रानी देवलता राजपूत बिरादरी से संबंध रखती हैं। शशि बाला पुंडीर 1993 में भारतीय जनता पार्टी से देवबंद से और रानी देवलता मुजफ्फराबाद सीट (अब बेहट) से भाजपा से विधायक चुनी गई थीं।

सहारनपुर जिले के इतिहास में दिवंगत 75 वर्षीय बिमला राकेश सबसे ज्यादा छह बार यानि 1977, 1980, 1985, 1989, 1991 और 2003 (उपचुनाव में) गैर कांग्रेस, गैर भाजपा, गैर बसपा दल से हरोड़ा सुरक्षित सीट से विधायक चुनी गर्इं। इसी सीट से दलित कांग्रेस महिला नेत्री दिवंगत शकुंतला देवी चार बार 1962, 1967, 1969 एवं 1974 में विधायक चुनी गर्इं। शकुंतला देवी एक बार विधान परिषद की सदस्य भी कांग्रेस से बनाई गई थीं। हरोड़ा सुरक्षित सीट, जो सहारनपुर देहात सामान्य कहलाती है, से दो बार 1996 और 2002 में बसपा प्रमुख मायावती विधायक चुनी गर्इं। संयोग यह रहा कि दोनों बार वे प्रदेश की मुख्यमंत्री थीं।

सहारनपुर से छठी महिला विधायक दलित वर्ग की सत्तो देवी थीं जो नांगल सुरक्षित सीट से 2005 में हुए उपचुनाव में बसपा उम्मीदवार के रूप में विधानसभा पहुंची थीं। यह उपचुनाव उनके विधायक पति ईलम सिंह की मृत्यु के कारण हुआ था।यही छह महिलाएं सहारनपुर के इतिहास में विधानसभा में पहुंची हैं। इन छह में से सत्तो देवी, विमला राकेश और शकुंतला देवी का निधन हो चुका है। रानी देवलता राजनीति में सक्रिय नहीं हैं। शशि बाला पुंडीर सपा में हैं और देवबंद क्षेत्र में अपनी सक्रियता बनाए हुए हैं।

जिला पंचायत सदस्य और दलित महिला नेत्री ममता चौधरी हाल ही में बसपा छोड़कर सपा में शामिल हुई हैं और वह जिले की रामपुर मनिहारान सुरक्षित सीट से सपा टिकट की दावेदार हैं। अखिलेश यादव ने उन्हें चुनाव लड़ाने का भरोसा दे रखा है। इसके अलावा सहारनपुर नगर की उमा भूषण एक बार कांग्रेस से और शुगप्ता खान एक बार बसपा से गंगोह सीट से चुनाव लड़ चुकी हैं। कांग्रेस समेत सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के पास ऐसी महिलाओं का घोर अभाव है जो विधानसभा चुनाव में उतारी जा सकती है।