Women

कोरोना का असर: 2021 तक 43.5 करोड़ महिलाएं हो जाएंगी गरीब, UN का अनुमान- एक साल में बढ़ेंगे 9.6 करोड़ गरीब

संयुक्त राष्ट्र महिला एवं संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के इस नये आकलन में कहा गया कि कोविड-19 संकट महिलाओं के लिए गरीबी दर को बढ़ा देगा और गरीबी में रहने वाली महिलाओं एवं पुरुषों के बीच का अंतर बढ़ जाएगा।

चौपाल: असुरक्षित महिलाएं

एक तरफ हम रामराज्य लाने के दावे कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ आए दिन महिलाओं के साथ दरिंदगी की घटनाएं घट रही हैं। यह समाज हम सबका समाज है और इसको सुरक्षित बनाने की जिम्मेदारी भी हम सब सबकी है। हमें एक बार फिर महिला सुरक्षा के लिए आवाज उठाने की जरूरत है।

Deepa Malik Retirement: डॉक्टर ने कहा था कभी चल नहीं पाएंगी, 20 साल की मेहनत के बाद बन गईं थीं ‘खेल रत्न’

दीपा पैरालम्पिक में मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी थीं। उन्होंने 2016 रियो पैरालम्पिक में शॉटपुट में सिल्वर मेडल अपने नाम किया था।

अमेरिका में महिलाओं के साथ भेदभाव, वर्ल्ड चैंपियन फुटबॉल टीम को नहीं मिलेगा मेन्स टीम के बराबर वेतन

अमेरिकी महिला फुटबॉल टीम अब तक सबसे ज्यादा 4 बार वर्ल्ड चैंपियन बन चुकी है। उसने 1991, 1999, 2015 और 2019 में खिताब अपने नाम किया था।

“महिलाएं चप्पल-जूते लेकर CM योगी का करेंगी घेराव”, कांग्रेस नेता ने चेताया, आवास से निकलना भी होगा मुश्किल

कहा ” पुलिस और प्रशासन महिलाओं को रोकने में सबसे आगे रहते हैं, लेकिन जब महिलाओं के खिलाफ अपराध होता है तो ये कहीं नहीं दिखाई पड़ते है।

आज की बात: दफ्तर में हो जिंदगी का बिंदास सफर

बंगलुरु की एक आइटी कंपनी में काम करने वाली अंबिका नंदिनी का कहना है लड़कियों के लिए नौकरी करना बहुत आसान नहीं है। एक तो लड़की होने के नाते कई कंपनी आपको जल्दी नौकरी नहीं देतीं। दूसरा जिन लड़कियों को नौकरी मिल भी जाती है तो उन्हें शारीरिक शोषण का भी सामना करना पड़ता है।

‘दुनिया मेरे आगे में’ में अनीता मिश्रा का लेख : वर्चस्व की हीनता

कुछ समय पहले पेप्सिको की अध्यक्ष इंदिरा नूयी ने कहा था- ‘हमारे साथ भी पुरुषों के समांतर बर्ताव किया जाए…! हमें हंसी में भी ‘स्वीटी’ या ‘हनी’ जैसे संबोधनों से न बुलाया जाए।’

सर्वे रिपोर्ट में खुलासा- कैब चालक और गार्ड जैसे रोजगारों में बढ़ रही महिलाओं की दिलचस्पी

रिपोर्ट के अनुसार, प्रति माह 10,981.44 रुपए के औसत वेतन के साथ डिलीवरी एग्जीक्यूटिव के रोजगार के लिए पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या 2.57 फीसदी बढ़ी है।

स्त्री विमर्शः पचास हजार औरतों की आवाज

सबसे ज्यादा अफसोस यह देख कर होता है कि इस देश के जनसेवक, जिन्हें राजनेता कहा जाता है, ऐसे मसलों पर अकसर चुप्पी साध जाते हैं।

पानी के लिए रोज बलात्‍कार का जोखिम उठाती हैं करीब दो करोड़ महिलाएं

एक शोध में अफ्रीकी देशों में पानी को लेकर गंभीर होते हालातों पर रोशनी डाली गई है। शोध के मुताबिक महाद्वीप में पानी की समस्‍या भयावह है।

महिलाओं में माइग्रेन से हो सकता Heartattack, कम उम्र में मौत का खतरा

माइग्रेन से पीड़ित महिलाओं में हृदयाघात और स्ट्रोक का खतरा धीरे-धीरे बढ़ता है और इन कारणों से उनकी मौत वैसे लोगों की तुलना में पहले हो सकती है जिन्हें माइग्रेन नहीं है।

दलित विमर्श : स्त्रीवाद की संश्लिष्ट वैचारिकी

दलित साहित्य की पहचान उसकी कथ्य केंद्रीयता है। यहां अंतर्वस्तु ही मुख्य है, शिल्प नहीं। समस्त जोर इस पर रहता है कि क्या कहना है, कैसे कहना है यह मुद्दा पीछे पड़ जाता है।

दु‍कान के सामान की तरह खाड़ी देशों को बेची जाती हैं भारतीय महिलाएं: मंत्री

आंध प्रदेश के अप्रवासी भारतीय कल्‍याण मंत्री पल्‍ले रघुनाथ रेड्डी ने विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज को पत्र लिखकर उन देशों में फंसी महिलाओं को वापस लाने के लिए कार्रवाई करने की मांग की है।

आधी आबादी : औजार, बाजार और महिला सुरक्षा

महिलाओं को बुरी नीयत वाले लोगों से महफूज बनाने के लिए पैनिक बटन वाला मोबाइल, रिवॉल्वर या पेप्पर स्प्रे थमाना ठीक वैसा ही जैसा भ्रष्टाचार से निपटने के लिए लोगों को खुद ही स्टिंग ऑपरेशन करने के लिए कहना।

सेना में विवाहित महिला विधि स्नातकों की भर्ती पर केंद्र रुख स्पष्ट करे : हाई कोर्ट

याचिका में आरोप लगाया गया कि जेएजी की विज्ञापित रिक्तियों में ‘महिलाओं के लिए सीटों का असमान वितरण-आवंटन’ था। इसमें पुरुषों के लिए 10 और महिलाओं के लिए महज चार सीटें थीं।

आदिवासी संस्कृति : आदिवासी समाज में स्त्री

आदिम समुदायों में लड़की को अपना पति चुनने की उतनी ही स्वतंत्रता होती है, जितनी लड़के को।

उजाला कार्यक्रम से ऊर्जा संरक्षण की ओर अग्रसर देश: गोयल

भारत सरकार का महत्त्वाकांक्षी राष्ट्रीय एलईडी कार्यक्रम उजाला 2019 तक देशभर में लागू कर दिया जाएगा। इससे बड़ी मात्रा में बिजली की बचत के साथ देश ऊर्जा संरक्षण को सुनिश्चत करने की दिशा में अग्रसर होगा।

राजनीतिः सार्वजनिक दायरे में स्त्री

कल्पना करें कि अगर हमारे समाज में, चाहे वह शहर हो या गांव हो या कस्बा, यौन हिंसा का भय न हो तो कितना निर्भय होकर लड़कियां सार्वजनिक स्थानों पर घूम-फिर सकेंगी और और कितने सारे कामों को अंजाम दे पाएंगी। आखिर क्यों निरंतर भय के वातावरण में उनकी आवाजाही हो रही है? यह अघोषित कर्फ्यू कब समाप्त होगा?

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