AAP Loses In Himachal Pradesh: दिल्ली (Delhi) में कई वर्षों से सत्ता में बैठी आम आदमी पार्टी (AAP) को कुछ महीने पहले पंजाब विधानसभा (Punjab Assembly) में जरूर सत्ता संभालने का अवसर मिल गया, लेकिन पड़ोस के हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में पार्टी बुरी तरह पिछड़ गई। वहां पर पार्टी के सभी 67 प्रत्याशियों (Candidates) की जमानत (Deposits) जब्त हो गई। दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी के वोट लगभग बराबर है। बहुत मामूली अंतर है, लेकिन सीटों के मामले में पीछे हो गए। वहां पर भाजपा की सीटें कांग्रेस से 15 कम हो गईं।
कई सीटों पर AAP को NOTA से भी कम वोट मिले
हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने वाली AAP को केवल 1.10 प्रतिशत मत हासिल हुए। कई सीट पर आप को नोटा (NOTA) से भी कम वोट मिले। हिमाचल में नोटा का वोट प्रतिशत करीब 0.60 रहा। डलहौजी, कसुम्पटी, चौपाल, अर्की, चंबा और चुराह जैसे निर्वाचन क्षेत्रों में AAP से ज्यादा वोट नोटा के खाते में गए।
एक दिन पहले ही दिल्ली नगर निगम (MCD) में बहुमत से जीत हासिल की थी
आम आदमी पार्टी (AAP) ने एक दिन पहले ही दिल्ली नगर निगम (MCD) में भाजपा (BJP) के 15 साल पुराने शासन को खत्म करते हुए आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) ने वहां अपनी सत्ता जमाई थी। उसे उम्मीद थी कि दिल्ली नगर निगम (MCD) की तरह ही गुजरात (Gujarat) और हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में भी पार्टी को भरपूर समर्थन मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
AAP मुखिया अरविंद केजरीवाल ने कई तरह की Freebies की घोषणा की थी
आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) के मुखिया और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने दिल्ली की तरह तमाम तरह की मुफ्त सुविधाओं (freebies) को देने के लिए हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) और गुजरात (Gujarat) में जनता से वादे किए थे, लेकिन जनता ने उनके ऐसे मुफ्त वादों को दरकिनार कर दोनों राज्यों में उनकी पार्टी को सत्ता से बहुत दूर रखा।
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हिमाचल प्रदेश में AAP ने BJP – Congress से अलग तीसरा विकल्प देने का किया था वादा
हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) ने जनता के सामने भाजपा (BJP) और कांग्रेस (Congress) से अलग एक तीसरा विकल्प (Option) देने का वादा किया था, लेकिन जनता अपनी पुरानी परंपरा पर चलते हुए एक बार भाजपा और एक बार कांग्रेस की ही तर्ज पर इस बार कांग्रेस को सरकार बनाने का अवसर दिया है। वहां की जनता ने आम आदमी पार्टी को पूरी तरह से अस्वीकार करते हुए एक भी सीट नहीं दी। वहां पर उसके एक भी प्रत्याशी की जमानत नहीं बच पाई। इससे आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है।
इस बीच आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) ने कहा है कि वह अपनी पराजय के कारणों की समीक्षा (Review of Defeat) करेंगे और देखेंगे कि जनता का समर्थन पाने में कहां चूक रह गई।
