नवाबों के शहर लखनऊ को भिखारियों से निजात दिलाने के लिए नगर निगम ने एक शानदार पहल की है। सबकुछ ठीक-ठाक रहा तो जल्द ही शहर में भिखारी नजर नहीं आएंगे। लखनऊ नगर निगम ने शारीरिक रूप से फिट भिखारियों को दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी बनाने का फैसला किया है। प्रशासन इस योजना को बेहद गंभीरता से ले रहा है। इसी के चलते उन भिखारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी योजना है जो शारीरिक रूप से फिट होने के बावजूद काम करने को तैयार नहीं हैं।
लखनऊ नगर निगम के कमिश्नर इंद्रमणि त्रिपाठी ने करीब एक महीने तक सर्वे कराया। इसमें पता चला कि शहर में करीब 4500 भिखारी हैं। पहले प्लान के तहत इनमें से 45 को काम दिया जाएगा। त्रिपाठी ने कहा, ‘ज्यादातर भिखारी शारीरिक रूप से फिट हैं लेकिन वे काम नहीं करते क्योंकि उन्हें आसानी से पैसा मिल जाता है।’ अगले राउंड में अन्य 45 भिखारियों को एक एनजीओ द्वारा काम दिया जाएगा। जो भिखारी पढ़-लिख सकते हैं उन्हें राजस्व संग्रहण जैसे कामों में लगाया जाएगा।
National Hindi News, 29 June 2019 LIVE Updates: देश-दुनिया की तमाम अहम खबरों के लिए क्लिक करें
त्रिपाठी ने कहा, ‘हम कई एनजीओ से बातचीत कर रहे हैं। वो इन्हें सफाई और कचरा एकत्र करने के काम में भी लगाएंगे। यह उन्हें काम दिलाने के लिए है। इसके साथ-साथ इसके जरिये शहर को भिक्षावृत्ति जैसी सामाजिक बुराई से भी छुटकारा दिलाया जा सकेगा। यह प्रवृत्ति टूरिस्ट हब के तौर पर उभर रहे शहर पर एक धब्बे की तरह है। मुंबई में एक कानून के तहत भीख मांगने को गैरकानूनी घोषित किया जा चुका है। हमारे पास ऐसा कोई कानून नहीं है लेकिन हम राज्य सरकार से सलाह ले रहे हैं। इसके साथ ही हम भारतीय दंड संहिता का भी अध्ययन कर रहे हैं।’
Bihar News Today, 29 June 2019: बिहार से जुड़ी हर खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

