मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने मंगलवार को घोषणा की कि वे राज्यसभा में एक और कार्यकाल के लिए चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि विपक्षी कांग्रेस राज्य में युवा नेतृत्व को बढ़ावा देना चाहती है। जानकारी के मुताबिक, दिग्विजय चुनाव से पहले नर्मदा परिक्रमा करेंगे ताकि युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया जा सके।
कांग्रेस के अनुसूचित जाति विंग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने मंगलवार को सिंह से राज्यसभा में दलितों के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने का अनुरोध किया। यह अनुरोध दिग्विजय सिंह के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि भविष्य में अगर कोई अनुसूचित जाति समुदाय का व्यक्ति मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बने तो उन्हें खुशी होगी।
राज्यसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे दिग्विजय सिंह
सिंह की टिप्पणियों का हवाला देते हुए अहिरवार ने कहा, “इसी संदर्भ में, मध्य प्रदेश की लगभग 17% अनुसूचित जाति की आबादी की अपेक्षाओं को आपके सामने रखते हुए, मैं आपसे आग्रह करता हूं कि इस बार राज्यसभा में अनुसूचित जाति वर्ग से प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करें।” वहीं,अहिरवार के अनुरोध के बारे में पूछे जाने पर दिग्विजय सिंह ने कहा, “यह मेरे हाथ में नहीं है। मैं इतना ही कह सकता हूं कि मैं अपनी सीट खाली कर रहा हूं।”
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इस बारे में एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि यह विपक्ष के नेता राहुल गांधी के युवा नेताओं को बढ़ावा देकर कांग्रेस का पुनर्निर्माण करने के दृष्टिकोण के अनुरूप है। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “संगठनात्मक रूप से काफी मजबूत दिग्विजय सिंह को जमीनी स्तर के संगठन को और मजबूत करने के लिए भेजा जाएगा और साथ ही वे चुनाव से पहले एक और नर्मदा परिक्रमा भी करेंगे ताकि युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया जा सके।”
दिग्विजय सिंह को जमीनी स्तर पर तैनात किया जा सकता है
दिग्विजय को अगर जमीनी स्तर पर फिर से तैनात किया जाता है तो यह उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य होगा। दो दशकों तक विपक्ष की राजनीति करने के बाद राज्य कांग्रेस संगठनात्मक रूप से खोखली हो चुकी है, बूथ समितियां निष्क्रिय हैं, गुटों में दरारें हैं, संसाधनों की कमी है, और 2020 में हुए दलबदल का असर अभी भी बना हुआ है जिससे पार्टी को न केवल विधायकों का नुकसान हुआ बल्कि कार्यकर्ताओं का मनोबल भी चकनाचूर हो गया।
राज्यसभा में अपने पूरे कार्यकाल के दौरान, कांग्रेस नेता वैचारिक मुद्दों पर हमेशा आक्रामक रहे और अक्सर आरएसएस और भाजपा के साथ जुबानी जंग में उलझे रहे। हिंदुत्व की राजनीति का डटकर सामना करने की उनकी तत्परता ने उन्हें धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील हलकों में भी प्रशंसा दिलाई है। पिछले महीने, दिग्विजय सिंह ने भाजपा और आरएसएस की संगठनात्मक शक्ति और नरेंद्र मोदी के एक साधारण पार्टी कार्यकर्ता से प्रधानमंत्री बनने तक के सफर की जमकर तारीफ करके सबको चौंका दिया था। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस के भीतर सत्ता के विकेंद्रीकरण और अपनी संगठनात्मक संरचना को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया था। हालांकि, बाद में उन्होंने स्पष्ट किया था कि वे आरएसएस की विचारधारा और नरेंद्र मोदी के कामकाज और उनकी नीतियों के सबसे कड़े आलोचकों में से एक हैं।
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