मोदी सरकार के लाए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे क‍िसान संगठनों में से एक, कीर्ति किसान यूनियन (KKU) का कहना है क‍ि बीजेपी का आईटी सेल इस आंदोलन को बदनाम करने में लगा है। संगठन के उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह ने एनडीटीवी इंड‍िया से कहा, “बीजेपी सरकार का आईटी सेल हमारे आंदोलन को लगातार बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। अंग्रेजों के ‘बांटो और राज करो’ की नीति के बाद ये इतना बड़ा आंदोलन है, जिसमें सब कुछ (धर्म-जाति, भाषा और क्षेत्र आदि) पीछे छूट गया है।”

बकौल सिंह, “जो लोग पंजाब बनाम हरियाणा की सियासत कर रहे थे, वे लोग भी अब…जब हरियाणा वाले बोलते हैं कि पंजाब हमारा बड़ा भाई है। ऐसे में वे कैसे बोल सकते हैं। वो कह रहे थे कि ये खालिस्तानी हैं, पर इसमें तो और राज्यों के किसान भी आ रहे हैं। वे लगातार पहुंच रहे हैं। ऐसे में वे इस तरह का झूठ फैलाकर वे कुछ भी हासिल नहीं कर पाएंगे।”

राजेंद्र स‍िंंह उन आरोपों का जवाब दे रहे थे, ज‍िनमें कहा गया क‍ि क‍िसान आंदोलन के नाम पर खाल‍िस्‍तान समर्थक अपना एजेंडा चला रहे हैं।

KKU लंबे समय से खेती-किसानी से जुड़ा रहा है। इसके नेताओं और कार्यकर्ताओं ने खालिस्तान का विरोध करते हुए अपनी जानें गंवाई हैं। संगठन के तीन अध्यक्षों ने खालिस्तानियों से लोहा लेते हुए अपने प्राणों की कुर्बानी दे दी है। इनमें जयमल सिंह पड्डा (1988), सरबजीत सिंह भिट्टेवाढ़ (1990) और ज्ञान सिंह सांघा (1992) के नाम शामिल हैं।

केकेयू के तरलोक सिंह मेहलानवाला, अमरीक सिंह पनियार, हरदेव सिंह बब्बू, बलवंत सिंह लल्ला अफगाना और बलदेव सिंह मान समेत दर्जनों संगठन पदाधिकारियों ने खालिस्तानियों के खिलाफ हुंकार भरी।

KKU ने न सिर्फ राष्ट्र आधारित आतंकवाद का विरोध किया है, बल्कि तमाम किस्म की सांप्रदायिकताओं (सिख सांप्रदायिकता) का भी विरोध किया है।

NDTV India के पत्रकार रवीश कुमार ने अपनेे डेली शो ‘प्राइम टाइम’ में केकेयू के योगदान के बारे में बताया। बाद में इस कार्यक्रम का वीड‍ियो फेसबुक पर पोस्‍ट क‍िया। उन्‍होंने NITI Aayog के सीईओ अमिताभ कांत के उस बयान पर कटाक्ष किया है, जिसमें कांत ने भारत में अत्यधिक लोकतंत्र होने की वजह से कड़े सुधार लाने में कठिनाई की बात का जिक्र किया था।

कुमार ने शुक्रवार को अपने एक फेसबुक पोस्ट में इस बात को शामिल किया और 10 द‍िसंबर के ‘प्राइम टाइम’ का वीड‍ियो शेयर करते हुुुए ल‍िखा- किसानों को आतंकी कहने से पहले इस लेख को पढ़ लें या प्राइम टाइम देख लें।  उन्होंने ल‍िखा- जनता के गुणसूत्र और जनधर्म को बदल कर सहमतियों का दायरा इतना बड़ा तो कर ही लिया गया है कि किसान को आतंकवादी कहा जा सकता है। किसी लेखक को पाकिस्तानी कहा जा सकता है। पाकिस्तानी, आतंकवादी, नक्सली ये सब मुसलमान के लिए इस्तमाल होने वाले पर्यायवाची हैं।

दिल्ली में किसानों के विरोध प्रदर्शन की एक तस्वीर। फोटो सोर्स- पीटीआई

बकौल रवीश, “आई टी सेल, गोदी मीडिया के अख़बार, चैनल सबने मिल कर बिजली की गति से इस देश की जनता के दिमाग़ में एक नया यथार्थ लोक बना दिया है। जिसका सामने के यथार्थ से कोई नाता नहीं होता है। उस यथार्थ लोक में जनता की ज़रूरत नहीं है। वहां ज़रूरी होने की पहली शर्त ही यही है कि जनता होना छोड़ दें।” उ

रवीश के मुताबिक, “नीति आयोग के कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने इसे दूसरे शब्दों में कहा है। भारत में कुछ ज़्यादा ही लोकतंत्र हैं। टू मच डेमोक्रेसी (अत्यधिक लोकतंत्र), उनके लिए लोकतंत्र नमक हो गया है जिसका ज़्यादा होना ठीक नहीं है। तानाशाही मिठाई है। ज़्यादा हो जाए तो कोई बात नहीं। अहंकारी होने का स्वर्ण युग है।

दरअसल, कांत ने मंगलवार को कहा था कि भारत में कड़े सुधारों को लागू करना कठिन होता है। साथ ही देश को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए और बड़े सुधारों की जरूरत है। उनके मुताबिक, ‘‘भारत के संदर्भ में कड़े सुधारों को लागू करना बहुत मुश्किल है। इसकी वजह यह है कि चीन के विपरीत हम एक लोकतांत्रिक देश हैं … हमें वैश्विक चैंपियन बनाने पर जोर देना चाहिए। आपको इन सुधारों (खनन, कोयला, श्रम, कृषि) को आगे बढ़ाने के लिये राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत है और अभी भी कई सुधार हैं, जिन्हें आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।’’

कांत की टिप्पणी की विपक्ष की तरफ से आलोचना हुई, जिसके बाद बीजेपी खेमे से मंत्रियों तक को सफाई देनी पड़ी। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को कहा कि भारत को अपने लोकतंत्र पर गर्व है और भाजपा लोगों का विश्वास जीतने के लिए इसके जरिए काम करेगी।

कांत के बयान पर पर प्रसाद ने कैबिनेट ब्रीफिंग में बताया था, ‘‘भारत को अपने लोकतंत्र पर गर्व है। देश के लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेम करते हैं और उन्हें उन पर विश्वास है तथा यह जमीनी स्तर पर देखा गया है क्योंकि भाजपा ने गांवों तक में जीत दर्ज की है। हम लोगों का विश्वास जीतने के लिए लोकतत्र के माध्यम से काम करेंगे।’’