Election Commission: देश के कई राज्यों में चल रही एसआईआर की प्रक्रिया के काम में लगे बूथ लेवल अफसरों (बीएलओ) को चुनाव आयोग ने बड़ा तोहफा दिया है। चुनाव आयोग ने बीएलओ का मेहनताना 6000 से बढ़ाकर 12000 रुपये कर दिया है। इसके अलावा बीएलओ सुपरवाइजर के मेहनताने में भी बढ़ोतरी की गई है।
पहले बीएलओ सुपरवाइजर को 12000 रुपये मिलते थे जिसे बढ़ाकर 18000 रुपये कर दिया गया है। चुनाव आयोग ने शनिवार शाम को इस संबंध में एक प्रेस रिलीज जारी कर यह जानकारी दी है।
कई जगहों पर हुई बीएलओ की मौत
एसआईआर की प्रक्रिया शुरू होने के बाद से ही बड़ी संख्या में बीएलओ की मौत होने की खबर सामने आई है। कई जगहों पर बीएलओ ने आत्महत्या भी कर ली। उनके परिजनों ने आरोप लगाया था कि काम के दबाव के चलते उन्होंने ऐसा आत्मघाती कदम उठाया था।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सहित तमाम नेताओं ने बीएलओ की मौत के मुद्दे को बड़े पैमाने पर उठाया था और चुनाव आयोग से इस मामले में कार्रवाई करने की अपील की थी। तमाम आलोचनाओं के बीच ही चुनाव आयोग ने बीएलओ और बीएलओ सुपरवाइजर का मेहनताना बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है।
BLO क्या होता है ?
बीएलओ ने कभी न कभी आपके घर की घंटी भी जरूर बजाई होगी, ये वही शख्स होता है जो आपका वोटर आईडी कार्ड बनाने का काम करता है। ये सबसे निचले स्तर का चुनाव अधिकारी होता है। हर BLO के पास एक बूथ की जिम्मेदारी होती है, यानी उस बूथ पर जितने भी लोग वोट डालने आएंगे, उनके सत्यापन से लेकर उनके वोटर आईडी कार्ड की जिम्मेदारी इसी बीएलओ के पास होती है। आमतौर पर प्राइमरी स्कूलों के टीचर या फिर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ही BLO की जिम्मेदारी निभाते हैं।
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BLO क्या करता है ?
BLO हर घर में जाकर ये सुनिश्चित करता है कि वहां मौजूद कोई ऐसा तो नहीं है, जिसके पास वोटर कार्ड नहीं है।
BLO की ही ये जिम्मेदारी होती है कि जो लोग पलायन कर चुके हैं या जिनकी मृत्यु हो चुकी है, उनके नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाएं।
फर्जी वोटों को रोकना या फिर इनकी शिकायत करना भी BLO की जिम्मेदारी होती है।
तनाव क्यों बढ़ रहा है?
सवाल है कि बीएलओ की नौकरी में इतना तनाव क्यों बढ़ रहा है। जैसा कि हमने आपको पहले ही बताया कि बीएलओ पहले से अपनी नौकरी कर रहा होता है, इसी नौकरी के साथ उसे बीएलओ का काम करना पड़ता है। यही वजह है कि कई बार ये काम काफी ज्यादा हैक्टिक हो जाता है और कर्मचारियों पर काम का बोझ दोगुना हो जाता है। SIR में इन्हीं बीएलओ को लोगों के फॉर्म की जांच करनी पड़ रही है और उनका पूरा सत्यापन कर रहे हैं। ऐसे में उनका काम काफी बढ़ गया है, जिससे कई कर्मचारी तनाव महसूस करते हैं। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि कुछ बीएलओ की मौत काम और प्रशासनिक दबाव के चलते हुई है। हालांकि, सरकार ने इन सभी आरोपों को निराधार बताया है।
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