Delhi Violence का मुद्दा सोमवार (दो मार्च, 2020) को संसद में गर्माया रहा। विपक्षी सांसदों ने दोनों ही सदनों (राज्यसभा और लोकसभा) में गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग उठाई। वे इस दौरान तख्तियां लिए थे, जिन पर लिखा था ‘अमित शाह इस्तीफा दो।’
समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक, निचले सदन लोकसभा में इस्तीफे की मांग के बीच हो-हल्ला इतना बढ़ गया कि नौबत BJP और INC के सांसदों में धक्का मुक्की तक की आ गई थी। इस पूरे हंगामे के बाद लोकसभा को दोपहर तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
Congress सांसद राम्या हरिदास ने इसके बाद लोकसभा में BJP सदस्य जसकौर मीणा पर मारपीट का आरोप लगाया। उन्होंने इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से शिकायत कर ऐक्शन की मांग भी की।
राम्या ने लिखित शिकायत में कहा है, ‘‘दो मार्च को दोपहर तीन बजे लोकसभा में मीणा ने मुझसे मारपीट की।’’ उन्होंने सवाल दागा, ‘‘क्या मेरे साथ ऐसा बार-बार इसलिए होता है, क्योंकि मैं एक दलित और महिला हूं?’’
दरअसल, विपक्षी सांसद गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग उठा रहे थे, जिसके बाद संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने जवाब दिया, “1984 में 3000 लोगों की जान गई, तब जो लोग ऐक्शन नहीं ले पाए, वे ही आज यहां हंगामा काट रहे हैं। मैं इस रवैये की कड़ी निंदा करता हूं।”
उधर, इस बवाल के मद्देनजर राज्यसभा में बजट सत्र की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है। यही नहीं, कांग्रेसी सांसदों ने दिल्ली हिंसा और शाह की इस्तीफे की मांग को लेकर संसद के कॉम्पलेक्स में भी विरोध प्रदर्शन किया।
इन विपक्षी सांसदों में पूर्व कांग्रेस चीफ राहुल गांधी भी थे। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की विशाल प्रतिमा के पास राहुल के साथ पार्टी नेता अधीर रंजन चौधरी, शशि थरूर और अन्य थे। और, ये सभी शाह के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी कर रहे थे।
कांग्रेसी सांसदों के पास उस दौरान ‘सेव अवर इंडिया’ (हमारा भारत बचाओ), ‘प्राइम मिनिस्टर मस्ट आंसर’ (प्रधानमंत्री को अब जवाब देना चाहिए) और ‘शाह मस्ट रिजाइन’ (शाह इस्तीफा दे दो) जैसे नारे लिखे थे।
लोकसभा में कांग्रेस दल के नेता अधीर रंजन चौधरी के हवाले से ‘पीटीआई’ की रिपोर्ट में कहा गया, “जब दिल्ली जल रही थी, तब हमारे गृह मंत्री अहमदाबाद में मेजबानी (नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम की, जिसमें दो दिनों के लिए US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत आए थे) कर रहे थे।”
उन्होंने पत्रकारों से कहा- दिल्ली हिंसा मामले की जांच होनी चाहिए। प्रधानमंत्री चीजों के तीन दिन बाद बोलते हैं, जबकि गृह मंत्री ने इस पर कुछ भी नहीं कहा है। अजीत डोवाल को मामले को देखने के लिए मौके पर भेजा गया, जो कि इन लोगों की विफलता है। (PTI-Bhasha इनपुट्स के साथ)
