Congress Poor Poll Performance: पिछले छह राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा है। अभी हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस केवल 6 सीटें ही जीत पाईं। जिसके बाद से विपक्षी इंडिया गठबंधन में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर सवाल उठने लगे। समाजवादी पार्टी के कई नेताओं ने अखिलेश यादव को इंडिया गठबंधन का नेतृत्व करने की मांग उठाई है। इससे पहले टीएमसी के कई नेता ममता बनर्जी का नाम उठा चुके हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव में जिस तरह कांग्रेस को बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा है। उसके बाद कांग्रेस के भविष्य और राहुल गांधी की लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं, क्योंकि पिछले छह विधानसभा चुनाव में कांग्रेस कुल 81 सीटों पर ही जीत हासिल कर सकी है, उससे ज्यादा भाजपा ने केवल बिहार विधानसभा चुनाव में 89 सीटों पर जीत हासिल की है। जो यह बताने के लिए काफी है कि कांग्रेस का नेतृत्व और उसकी रणनीति पूरी तरह से अब तक फेल साबित हुई है।
अगर पिछले छह विधानसभा चुनाव की बात करें तो कांग्रेस ने कुल 81 सीटें जीती हैं, जबकि भाजपा ने अकेले बिहार विधानसभा चुनाव में 89 सीटों पर फतह हासिल की है। कांग्रेस ने जिन छह राज्यों में 81 सीटें जीती हैं, वो इस प्रकार हैं-
बिहार- 6
दिल्ली- 0
महाराष्ट्र- 16
झारखंड- 16
हरियाणा- 37
जम्मू-कश्मीर- 6
बिहार विधानसभा चुनाव
बता दें, बिहार विधानसभा चुनावों में सत्तारूढ़ एनडीए ने 243 में से 202 सीटें जीतकर राज्य की सत्ता में वापसी की, जबकि विपक्षी महागठबंधन को केवल 35 सीटों पर समेट दिया। एनडीए की जीत में भाजपा सबसे आगे रही, जिसने 89 सीटें हासिल कीं, उसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जदयू ने 85 और चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोजपा (रालोद) ने 19 सीटें हासिल कीं।
महागठबंधन दलों में प्रमुख दल राजद की सीटें घटकर 25 रह गईं, जबकि कांग्रेस को केवल 6 सीटें ही मिल सकीं। बिहार में 2024 के लोकसभा चुनावों में, एनडीए ने कुल 40 सीटों में से 30 सीटें जीतीं, जिसमें भाजपा और जदयू को 12-12 सीटें मिलीं। लोजपा (रालोद) ने 5 सीटें जीतीं, जबकि हम (एस) को 1 सीट मिली। महागठबंधन ने 9 सीटें जीतीं, जिसमें राजद को 4, कांग्रेस को 3 और भाकपा (माले) एल को 2 सीटें मिलीं। शेष एक सीट एक निर्दलीय ने जीती।
बता दें, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बिहार के सात जिलों में 13 सभाएं कर 51 विधानसभा क्षेत्रों के उम्मीदवारों के लिए वोट मांगे थे, लेकिन जीत सिर्फ चार सीट पर ही मिली। राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा दोनों नेताओं ने कुल मिलाकर दर्जनों जिलों में 21 सभाएं कीं थी, जिसमें 105 सीटों को कवर किया, परंतु जीत का स्ट्राइक रेट कम रहा। इस चुनाव में कांग्रेस ने महागठबंधन के घटक के रूप में 61 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे।
बिहार के अलावा, भाजपा ने हाल के वर्षों में कई चुनावों में, चाहे अकेले लड़ी हो या एनडीए गठबंधन के साथ, शानदार जीत हासिल की है और कई राज्यों में विपक्ष परास्त किया है।
दिल्ली विधानसभा चुनाव
दिल्ली विधानसभा चुनाव की बात करें तो कांग्रेस 70 सीटों में से एक भी सीट नहीं जीत सकी। इतना जरूर की कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी (AAP) का खेल जरूर बिगाड़ दिया था, लेकिन खुद के लिए पार्टी कोई खास कमाल नहीं कर सकी। 67 सीटों पर उनके प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष, देवेंद्र यादव, अभिषेक दत्त और रोहित चौधरी ही अपनी जमानत बचा सके।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव
288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की बात करें तो नवंबर 2024 में हुए चुनावों में, महायुति या एनडीए ने 232 सीटें जीतकर भारी जीत दर्ज की, जिसमें भाजपा 132 सीटों के साथ शीर्ष पर रही, उसके बाद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को 57 और अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी को 41 सीटें मिलीं। विपक्षी महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सिर्फ 46 सीटें जीत सकी, जिसमें उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) को 20 सीटें, शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) को 10 और कांग्रेस को 16 सीटें मिलीं।
झारखंड विधानसभा चुनाव
झारखंड विधानसभा चुनाव की बात करें तो कांग्रेस को गठबंधन के तहत सीट बंटवारे में कुल 30 सीटों पर चुनाव लड़ने का मौका मिला था। इसमें से 16 सीटों पर पार्टी ने जीत हासिल की। यह भी एक संयोग है कि वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी को इतनी ही सीटों पर जीत मिली थी।
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हरियाणा विधानसभा चुनाव
हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 47 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल करने के साथ ही जीत की हैट्रिक भी लगाई थी। कांग्रेस 37 सीटें जीतकर दूसरे नंबर पर रही। 90 विधानसभा सीटों में भाजपा ने जीत के लिए कांग्रेस की ओर से पिछले विधानसभा चुनाव में जीती गईं 13 सीटों पर सेंध लगाई।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव
जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 39 सीटों पर चुनाव लड़ा और सिर्फ 6 सीटों पर जीत हासिल की। इसे देखते हुए लगता है कि यदि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस से गठबंधन न किया होता तो भी शायद वह अपने बलबूते सरकार बनाने के लिए जरूरी सीटें हासिल कर लेती। जम्मू कश्मीर विधानसभा में बहुमत के लिए 46 सीटों की जरूरत होती है और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 42 सीटें जीती थीं। इन छह राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम से कांग्रेस के भविष्य और नेतृत्व पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
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