Rabri Devi: बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने सोमवार (24 नवंबर) को एक आवेदन दायर कर अपने खिलाफ सीबीआई और ईडी के सभी मामलों को किसी अन्य अदालत में ट्रांसफर करने की मांग की। उन्होंने तर्क दिया कि उन्हें अब वर्तमान न्यायाधीश के समक्ष निष्पक्ष सुनवाई मिलने का भरोसा नहीं है।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, राउज एवेन्यू कोर्ट के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के समक्ष दायर याचिका में राबड़ी देवी ने न्यायाधीश गोगने के समक्ष लंबित चार मामलों को स्थानांतरित करने की मांग की है। इनमें आईआरसीटीसी घोटाला, कथित नौकरी के बदले नकदी का मामला और उनसे जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग की कार्यवाही शामिल है।

13 अक्टूबर को न्यायाधीश गोगने ने आईआरसीटीसी मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और कई अन्य के खिलाफ आपराधिक आरोप तय किए थे।

राबड़ी देवी ने न्यायाधीश पर पक्षपातपूर्ण होने का आरोप लगाया है और कहा है कि वह पूर्वनियोजित मन से उनके और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ मुकदमा चला रहे हैं। उनकी दलील के अनुसार, न्यायाधीश अभियोजन पक्ष के प्रति “अनुचित रूप से झुके हुए” हैं।

आवेदन में कहा गया है, “उपर्युक्त सभी मामलों में कार्यवाही के दौरान विभिन्न अवसरों पर माननीय विशेष न्यायाधीश का आचरण अभियोजन पक्ष और पक्षपात की ओर अनुचित रूप से झुका हुआ प्रतीत होता है, जिसे मामले की कार्यवाही/आदेशों के कई उदाहरणों से देखा जा सकता है, जिससे आवेदक के मन में पक्षपात की उचित आशंका पैदा हुई है और न्याय, समानता और निष्पक्षता के हित में मामलों को सक्षम क्षेत्राधिकार वाले किसी अन्य न्यायालय में स्थानांतरित करने की आवश्यकता है। “

याचिका में आरोप लगाया गया है कि न्यायाधीश का आचरण उनसे अपेक्षित निष्पक्षता को प्रभावित करता है और राबड़ी देवी के मन में “पक्षपात की उचित संभावना” पैदा करता है। आवेदन में कहा गया है, “उक्त आशंका अटकलों या कल्पना पर आधारित नहीं है, बल्कि विशिष्ट घटनाओं पर आधारित है जो माननीय विशेष न्यायाधीश के समक्ष लंबित मामलों की कार्यवाही के दौरान घटित हुई हैं, जिनमें आवेदक एक आरोपी है।”

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आईआरसीटीसी मामले में सीबीआई ने आरोप लगाया है कि लालू यादव और उनके परिवार ने केंद्रीय रेल मंत्री रहते हुए एक निजी फर्म को ठेके देने के लिए रिश्वत के रूप में बेशकीमती जमीन और शेयर स्वीकार किए थे। इस मामले में न्यायालय ने यादव परिवार के खिलाफ आरोप तय किए।

इस बीच, नौकरी के बदले नकदी मामले में आरोप यह है कि लालू यादव के केंद्रीय रेल मंत्री रहने के दौरान, बिहार के विभिन्न निवासियों को नौकरी दी गई, क्योंकि उन्होंने अपनी जमीन यादव और उनके परिवार के सदस्यों के नाम कर दी थी। ईडी इन मामलों में कथित धन शोधन के लिए यादव और उनके परिवार के सदस्यों पर मुकदमा चला रहा है।

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