पश्चिम बंगाल की राजनीति में प्रवर्तन निदेशालय के छापों ने सियासी पारा बढ़ा दिया है। गुरुवार को जब ईडी ने Indian Political Action Committee (I-PAC) के कोलकाता दफ्तर पर छापा मारा तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तुरंत मौके पर पहुंची और एक ग्रीन फाइल के साथ बाहर आईं। उसके बाद से ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। सीएम ममता का दावा है कि बीजेपी ईडी के जरिए टीएमसी की चुनावी रणनीति चुराना चाहती है, वहीं बीजेपी का दावा है कि सीएम ममता घोटालेबाजों को बचा रही हैं, भ्रष्टाचार को दबाने की कोशिश कर रही हैं।
अब इस पूरे विवाद के एपीसेंटर में I-PAC है जिसने टीएमसी के अलावा भी कई दूसरे राजनीतिक दलों के साथ काम किया है। टीएमसी के अलावा वर्तमान में I-PAC की एक बड़ी क्लाइंट डीएमके है। तमिलनाडु में भी इस साल पश्चिम बंगाल के साथ चुनाव होने हैं, ऐसे में वहां भी ईडी कार्रवाई के बाद से एक असहजता है। बताया जा रहा है कि टीएमसी के साथ तो आई-पैक व्यापक तौर पर जुड़ी हुई है, कई पहलुओं पर हस्तक्षेप रहता है, वहीं डीएमके के लिए इसी कंपनी के 20 लोग तमिलनाडु में काम कर रहे हैं।
आई-पैक सबसे पहले लाइमलाइट में 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान आई थी। उस समय आई-पैक ने बीजेपी के लिए काम किया था और नरेंद्र मोदी को सत्ता में बैठाने में एक अहम भूमिका अदा की थी। उसके बाद आई-पैक ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ काम किया। ये बात 2015 की है जब बिहार की राजनीति बदली थी, जेडीयू ने बीजेपी से खुद को अलग किया था। इसके बाद आई-पैक 2017 में कांग्रेस की मदद करने गई, पंजाब और उत्तर प्रदेश में उसकी रणनीति बनाई।
2019 में आंध्र प्रदेश की राजनीति में दस्तक दी गई और YSRCP के जगन मोहन रेड्डी के लिए काम किया गया। आई-पैक ने इसके अलावा 2019 में शिवसेना के साथ भी काम किया, तब तक पार्टी में दो फाड़ नहीं हुई थी। 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी के साथ भी इस कंपनी ने करीब से काम किया। फिर अब 2025 में डीएमके की रणनीति बनाने में भी आई-पैक अपनी भूमिका अदा कर रही है। समझने वाली बात यह है कि 2014 से 2021 तक आई-पैक के साथ प्रशांत किशोर जुड़े हुए थे, उन्हीं की ये कंपनी थी, लेकिन पिछले बंगाल चुनाव के बाद उन्होंने खुद को उस कंपनी से अलग किया और अपनी राजनीति पर फोकस किया। वर्तमान में जन सुराज पार्टी के प्रमुख हैं और बिहार की राजनीति में पूरी तरह सक्रिय हो चुके हैं।
वहीं आई-पैक सबसे लंबे समय तक टीएमसी के साथ ही जुड़ी हुई है। कंपनी के को-फाउंडर प्रतीक जैन पर्दे के पीछे से टीएमसी की रणनीति को धार देने का काम कर रहे हैं। लेकिन ईडी की एक छापे ने अब ना सिर्फ कंपनी को विवादों में ला दिया है बल्कि बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का एक नया दौर शुरू हो चुका है।
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