छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करना आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में आम बात हो गई है। कोई ट्रैफिक में फंस जाए, ऑफिस में बात बिगड़ जाए या घर में छोटी बहस हो जाए… कई लोग तुरंत गुस्से में आ जाते हैं। अक्सर हम इसे अपने स्वभाव का हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही गुस्सा आपकी सेहत के लिए बड़ा खतरा बन सकता है? दरअसल, एक्सपर्ट्स और रिसर्च बताते हैं कि बार-बार गुस्सा करने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और हार्ट से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा भी कई गुना हो जाता है।
गुस्सा और शरीर का रिश्ता क्या है?
जब किसी व्यक्ति को गुस्सा आता है, तो यह सिर्फ मन तक सीमित नहीं रहता। गुस्से की स्थिति में शरीर के अंदर कई बदलाव होते हैं। नई दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल की पूर्व फिजीशियन डॉ. विभा मेहता के मुताबिक, गुस्सा आने पर शरीर में स्ट्रेस हार्मोन जैसे एड्रेनालिन और कॉर्टिसोल रिलीज होते हैं। ये हार्मोन दिल की धड़कन को तेज कर देते हैं और नसों को सिकोड़ देते हैं। इसका सीधा असर ब्लड प्रेशर पर पड़ता है और वह अचानक बढ़ जाता है।
अचानक गुस्सा और ब्लड प्रेशर का खतरा
अक्सर लोग सोचते हैं कि हाई ब्लड प्रेशर सिर्फ गलत खानपान या खराब लाइफस्टाइल की वजह से होता है। लेकिन सच्चाई यह है कि अचानक आया गुस्सा भी ब्लड प्रेशर को अस्थायी रूप से काफी बढ़ा सकता है। सामान्य लोगों में यह बढ़ा हुआ प्रेशर कुछ समय बाद सामान्य हो सकता है, लेकिन जिन लोगों को पहले से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है, उनके लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है। अचानक बढ़ा हुआ प्रेशर हार्ट अटैक या स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्या की वजह बन सकता है।
हार्ट मरीजों के लिए क्यों ज्यादा खतरनाक है गुस्सा?
हार्ट के मरीजों को अक्सर डॉक्टर गुस्सा न करने की सलाह देते हैं। इसकी वजह साफ है। गुस्से में दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। दिल की धड़कन तेज हो जाती है और ब्लड फ्लो पर दबाव बढ़ जाता है। अगर दिल पहले से कमजोर है, तो वह इस दबाव को सहन नहीं कर पाता। ऐसे में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए एक्सपर्ट्स मानते हैं कि गुस्सा हार्ट मरीजों के लिए साइलेंट किलर की तरह काम कर सकता है।
बार-बार गुस्सा करने के नुकसान
एक-दो बार गुस्सा आ जाना अलग बात है, लेकिन अगर कोई व्यक्ति बार-बार गुस्से में रहता है, तो इसके लंबे समय के नुकसान भी होते हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, लगातार गुस्से और इमोशनल स्ट्रेस से आर्टरीज में सख्ती आ सकती है। इससे ब्लड फ्लो प्रभावित होता है और ब्लड प्रेशर धीरे-धीरे स्थायी रूप से बढ़ सकता है। डॉक्टर इसे स्ट्रेस-इंड्यूस्ड हाइपरटेंशन कहते हैं। इसका मतलब है कि तनाव और गुस्सा ही हाई ब्लड प्रेशर की वजह बन जाते हैं।
गुस्से का असर ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल पर भी
गुस्से का असर सिर्फ दिल और ब्लड प्रेशर तक सीमित नहीं रहता। गुस्से की स्थिति में शरीर का नर्वस सिस्टम और मेटाबॉलिज्म भी प्रभावित होता है। इससे ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल के स्तर में अस्थायी बदलाव आ सकते हैं। अगर यह बार-बार होता रहे, तो लंबे समय में डायबिटीज, हार्ट डिजीज और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा और बढ़ जाता है। खासतौर पर वे लोग, जिन्हें पहले से ब्लड प्रेशर या शुगर की समस्या है, उन्हें गुस्से से सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है।
गुस्सा दबाना या तुरंत निकाल देना, क्या सही है?
कई लोग गुस्सा तुरंत बाहर निकाल देते हैं, जबकि कुछ लोग उसे अंदर ही दबा लेते हैं। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि दोनों ही स्थितियां नुकसानदायक हो सकती हैं। गुस्सा तुरंत निकालने से रिश्ते और माहौल बिगड़ सकता है, वहीं गुस्सा दबाने से अंदरूनी तनाव बढ़ता है, जो सेहत को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए जरूरी है कि गुस्से को सही तरीके से कंट्रोल किया जाए।
गुस्सा कंट्रोल करने के आसान उपाय
गुस्से को काबू में रखने के लिए कुछ आसान और असरदार तरीके अपनाए जा सकते हैं। मेडिटेशन और डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज से मन को शांति मिलती है और ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। रोजाना थोड़ी फिजिकल एक्टिविटी जैसे वॉक, योग या हल्की एक्सरसाइज भी तनाव और गुस्से को कम करने में मदद करती है। इसके अलावा पर्याप्त नींद लेना, संतुलित आहार अपनाना और समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराना भी बेहद जरूरी है।
निष्कर्ष
डॉक्टरों की साफ सलाह है कि गुस्से पर नियंत्रण रखें, तनाव कम करें और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं। ऐसा करके न सिर्फ दिल और ब्लड प्रेशर सुरक्षित रहेंगे, बल्कि आपकी पूरी सेहत बेहतर बनी रहेगी।
डिस्क्लेमर
यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
