भारतीय घरों में रोटी रोज की थाली का अहम हिस्सा होती है। सुबह से रात तक गेहूं की रोटी खाते-खाते हम अक्सर यह सोचते ही नहीं कि क्या हर किसी के लिए सिर्फ गेहूं ही सबसे बेहतर विकल्प है? आजकल पेट की दिक्कतें, बढ़ता वजन, शुगर लेवल और पोषण की कमी लोगों को अपने खाने पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर कर रही है। आयुर्वेदिक डॉक्टर डॉ. सलीम जैदी के अनुसार, अगर हम रोज एक ही तरह की रोटी खाने के बजाय अलग-अलग आटे को अपनाएं, तो सेहत में बड़ा बदलाव आ सकता है।
क्यों जरूरी है रोटी में बदलाव?
डॉ. जैदी के मुताबिक, हर अनाज और दाल की अपनी अलग ताकत होती है। कोई हड्डियों के लिए अच्छा है, कोई पाचन के लिए, तो कोई शुगर कंट्रोल में मदद करता है। अगर हम रोज सिर्फ गेहूं की रोटी खाते हैं, तो शरीर को बाकी जरूरी पोषक तत्व पूरे नहीं मिल पाते। इसलिए रोटी का चुनाव सोच-समझकर करना बहुत जरूरी है।
गेहूं की रोटी
गेहूं की रोटी फाइबर और बी-विटामिन का अच्छा स्रोत है। यह पाचन को बेहतर बनाती है और शरीर को ऊर्जा देती है। लेकिन डॉ. जैदी बताते हैं कि जरूरत से ज्यादा गेहूं खाने से कुछ लोगों में वजन बढ़ सकता है और ब्लड शुगर भी ऊपर जा सकती है। इसलिए गेहूं की रोटी को दूसरे आटे के साथ मिलाकर खाना ज्यादा फायदेमंद होता है।
बाजरे की रोटी
बाजरा आयरन, मैग्नीशियम और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होता है। यह शरीर को गर्म रखता है और खून बनाने में मदद करता है। डायबिटीज के मरीजों के लिए बाजरे की रोटी बहुत अच्छी मानी जाती है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट आंखों की रोशनी और सूजन से जुड़ी समस्याओं में भी मदद करते हैं।
ज्वार की रोटी
ज्वार में फाइबर, आयरन और कैल्शियम अच्छी मात्रा में पाया जाता है। यह कैलोरी में कम होता है, इसलिए वजन कम करने वालों के लिए बढ़िया विकल्प है। ज्वार ग्लूटेन फ्री होता है, जिससे यह पेट के लिए हल्का और दिल की सेहत के लिए भी अच्छा माना जाता है।
रागी की रोटी
रागी कैल्शियम से भरपूर अनाज है। यह हड्डियों को मजबूत बनाता है और लंबे समय तक पेट भरा रखता है। डॉ. ज़ैदी के अनुसार, रागी से हीमोग्लोबिन बढ़ाने और शरीर की ताकत सुधारने में भी मदद मिलती है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह खासतौर पर फायदेमंद है।
मक्के की रोटी
मक्के की रोटी सर्दियों में ज्यादा खाई जाती है। इसमें विटामिन ए होता है और यह तुरंत ऊर्जा देती है। हालांकि, यह थोड़ी भारी होती है, इसलिए रोज-रोज खाने से पाचन से जुड़ी परेशानी हो सकती है। इसे सीमित मात्रा में ही खाना बेहतर है।
चावल के आटे की रोटी
चावल के आटे की रोटी ग्लूटेन फ्री होती है और पेट के लिए हल्की मानी जाती है। जिन लोगों को गैस या एसिडिटी की समस्या रहती है, उनके लिए यह अच्छा विकल्प हो सकता है। डॉ. जैदी के मुताबिक, यह ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में भी मदद कर सकती है।
बेसन की रोटी
बेसन की रोटी में प्रोटीन और फाइबर भरपूर होता है। यह मांसपेशियों को मजबूत बनाती है और ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखती है। वजन कम करने वालों के लिए बेसन की रोटी काफी फायदेमंद मानी जाती है, क्योंकि यह देर तक भूख नहीं लगने देती।
ओट्स की रोटी
ओट्स में पाया जाने वाला बीटा-ग्लूकन फाइबर कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करता है। ओट्स की रोटी पेट को साफ रखती है, दिल की सेहत सुधारती है और वजन कंट्रोल में भी सहायक होती है।
सही तरीका क्या है?
डॉ. सलीम जैदी की सलाह है कि एक ही आटे की रोटी रोज न खाएं। गेहूं के साथ बाजरा मिलाएं या ज्वार के साथ बेसन। इससे स्वाद भी अच्छा रहेगा और शरीर को अलग-अलग पोषक तत्व भी मिलेंगे।
निष्कर्ष
छोटे-छोटे बदलाव अगर रोज के खाने में किए जाएं, तो उनका असर लंबे समय तक दिखता है। रोटी जैसी आम चीज में बदलाव करके भी हम अपनी सेहत को बेहतर बना सकते हैं।
डिस्क्लेमर
यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
