सिटी स्कैन जिसे Computed Tomography (CT) Scan कहा जाता है जो शरीर के अंदरूनी अंगों, हड्डियों, मांसपेशियों और रक्त वाहिकाओं की स्पष्ट और विस्तृत तस्वीरें लेने की एक आधुनिक तकनीक है। ये टेस्ट इमरजेंसी में, बायोप्सी से पहले या कैंसर की स्टेजिंग के लिए बेहद मददगार होता है। X-ray की तुलना में CT स्कैन ज्यादा डिटेल देता है और इलाज की योजना बनाने में डॉक्टरों की मदद करता है। हाल ही में हुई रिसर्च ने चेतावनी दी है कि बार-बार CT स्कैन कराने से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। अमेरिका में किए गए अध्ययनों के मुताबिक CT स्कैन की वजह से 1 लाख से अधिक नए कैंसर के मामले पैदा हो सकते हैं, जो सभी नए मामलों के लगभग 5% हैं।

The Lancet में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, बार-बार रेडिएशन के संपर्क में आने से कैंसर कोशिकाओं के पनपने की संभावना बढ़ जाती है। रिसर्च बताती हैं कि बच्चों और युवाओं का शरीर रेडिएशन के प्रति अधिक संवेदनशील होता है। 10 साल से कम उम्र में किए गए मल्टीपल स्कैन से भविष्य में कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

सिटी स्कैन से कैंसर का कैसे खतरा बढ़ता है?

सीटी स्कैन आज के समय में बीमारियों की पहचान का सबसे सटीक जरिया है, लेकिन इसमें इस्तेमाल होने वाली आयोनाइजिंग रेडिएशन (Ionizing Radiation) को लेकर हमेशा से बहस रही है। रिसर्च बताती है कि रेडिएशन की अधिक मात्रा कोशिकाओं के DNA को नुकसान पहुंचा सकती है, जो भविष्य में कैंसर का कारण बन सकती हैं। अगर DNA क्षतिग्रस्त हो जाए तो कोशिकाएं अनियमित रूप से बढ़ने लगती हैं और कैंसर की शुरुआत हो सकती है। हमारी बॉडी DNA को ठीक कर सकती है, लेकिन लगातार या बार-बार रेडिएशन का संपर्क जोखिम बढ़ा देता है।

कौन-कौन से कैंसर का खतरा बढ़ता है?

  • फेफड़े का कैंसर
  • आंत (Colon) का कैंसर
  • ल्यूकेमिया
  • मूत्राशय (Bladder) का कैंसर
  • ब्रेन ट्यूमर
  • महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर
  • थायराइड कैंसर

किन लोगों को ज्यादा सावधानी रखनी चाहिए?

  • गर्भवती महिलाएं और भ्रूण को रेडिएशन से जोखिम ज्यादा होता है।
  • बार-बार इमेजिंग कराने वाले लोग जिनको बीमारी के कारण कई CT स्कैन करने पड़ते हैं, उन्हें MRI या अल्ट्रासाउंड जैसे विकल्प अपनाने चाहिए।
  • अगर CT स्कैन में कंट्रास्ट डाई का इस्तेमाल हो, तो डॉक्टर को पहले जरूर बताएं।

एक्सपर्ट की राय

डॉ. माधवी नायर, सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, मणिपाल हॉस्पिटल, बेंगलुरु के अनुसार एक बार CT स्कैन से आमतौर पर नुकसान नहीं होता। लेकिन अगर इसे बार-बार किया जाए तो रेडिएशन का एक्सपोजर बढ़ता है और कैंसर का जोखिम भी बढ़ता है। भारत में डॉक्टर ज़रूरत पड़ने पर ही CT स्कैन कराते हैं। डॉक्टरों का मानना है कि अगर स्थिति गंभीर है जैसे एक्सीडेंट या ट्यूमर की जांच तो CT स्कैन का फायदा इसके जोखिम से कहीं ज्यादा है। समस्या तब होती है जब बिना ठोस वजह के या बार-बार स्कैन कराया जाए।

खास बात

क्या आप जानते हैं? एक औसतन CT स्कैन से शरीर को उतना रेडिएशन मिलता है जितना हमें प्राकृतिक वातावरण से 3 से 5 साल में मिलता है। इसलिए एक्सपर्ट्स ‘ALARA’ (As Low As Reasonably Achievable) सिद्धांत का पालन करने की सलाह देते हैं।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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