हाई ब्लड प्रेशर एक ऐसी क्रॉनिक बीमारी है जिसे लाइफस्टाइल, डाइट और तनाव को कंट्रोल करके काबू में रखा जा सकता है। हाई ब्लड प्रेशर को अगर कंट्रोल नहीं किया जाए तो ये दिल के रोगों, किडनी और स्ट्रोक का कारण बनती है। हाई बीपी को कंट्रोल करने के लिए लाइफस्टाइल और डाइट ही काफी नहीं है बल्कि दवाओं का भी सेवन करना पड़ता है। हम सभी जानते हैं कि दवाओं का ज्यादा सेवन किडनी की सेहत बिगाड़ सकता है। अक्सर लोग ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने वाली दवा का सेवन करने से कतराते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि बीपी की दवा खाने से किडनी खराब हो सकती है। ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने वाली दवाएं आपकी ज़िंदगी को गंभीर बीमारियों के खतरे से सुरक्षित रखती हैं। लेकिन अगर इन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के बंद कर दिया जाए, तो इससे सेहत पर कई तरह के गंभीर और जानलेवा प्रभाव पड़ सकते हैं।
वॉकहार्ट हॉस्पिटल, मुंबई सेंट्रल में कंसल्टेंट इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. पारिन सांगोई ने बताया जिन लोगों का ब्लड प्रेशर हाई रहता है उनके लिए बीपी की दवाएं खाना जरूरी है। ये दवाएं किडनी को नुकसान नहीं पहुंचाती बल्कि आप दवाएं नहीं खाएंगे तब आपकी किडनी को नुकसान पहुंच सकता है।
एक्सपर्ट के मुताबिक लम्बे समय तक बीपी को कंट्रोल नहीं करेंगे तो बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर किडनी की छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे धीरे-धीरे किडनी की वेस्ट फिल्टर करने की क्षमता कम होने लगती है। यह प्रक्रिया अक्सर बिना किसी लक्षण के सालों तक चलती रहती है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि किडनी और बीपी की दवाओं को लेकर लोगों में कौन-कौन से मिथ है और उनसे कैसे बचना जरूरी है।
हाई बीपी से किडनी को नुकसान होता है या दवाओं से?
एक्सपर्ट ने बताया अगर आप लम्बे समय तक हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल नहीं करते तो बिना दवा खाएं ही किडनी को नुकसान पहुंचने लगता है। बीपी कंट्रोल करने के लिए दवा का सेवन करना जरूरी है। एक्सपर्ट ने बताया लोग गलत फहमी में दवाओं को दोष देने लगते हैं जबकि असली वजह दवाओं का नहीं सेवन करना है।
ब्लड प्रेशर नॉर्मल हो जाए तो दवा क्यों नहीं छोड़नी चाहिए?
ब्लड प्रेशर आमतौर पर लाइफटाइम कंडीशन होती है। अगर बीपी कंट्रोल रहने लगे और बिना डॉक्टर की सलाह के दवा को बंद कर दें तो ब्लड प्रेशर दोबारा बढ़ सकता है, वो भी बिना किसी चेतावनी संकेत के। इससे दिल, दिमाग और किडनी पर अचानक दबाव पड़ता है और हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी डैमेज का खतरा बढ़ जाता है। कई मरीज सोशल मीडिया, दोस्तों की सलाह या खुद को ठीक महसूस करने की वजह से दवा बंद कर देते हैं जिससे बीपी बेकाबू हो जाता है और बॉडी के अंगों को नुकसान पहुंचाने लगता है।
क्या लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव दवा का विकल्प हो सकता है?
हेल्दी डाइट, एक्सरसाइज, वजन कंट्रोल और स्ट्रेस मैनेजमेंट ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं, लेकिन ये दवाओं का विकल्प नहीं हैं। डॉ. सांगोई बताते हैं कि कुछ मामलों में लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव करने से दवा का डोज कम हो सकता है लेकिन दवा बंद नहीं हो सकती। दवा पूरी तरह बंद करने के लिए नियमित मॉनिटरिंग और डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
निष्कर्ष
डॉ. पारिन सांगोई के मुताबिक बीपी की दवाएं बॉडी के जरूरी अंगों को नुकसान से बचाती हैं नुकसान पहुंचाती नहीं है। दवाएं भविष्य में हेल्थ कॉम्प्लिकेशन से बचाव करती है। इस खबर में एक्सपर्ट ने सलाह दी है कि बीमारी का इलाज करने के फैसले डर या मिथकों पर नहीं, बल्कि मेडिकल सलाह पर आधारित होने चाहिए।
डिस्क्लेमर
यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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