Badi elaichi ke fayde: इलायची को यूं ही मसालों की रानी नहीं कहा जाता है। इसकी खुशबू और स्वाद किसी भी डिश को खास बना देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इलायची सिर्फ स्वाद बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सेहत के लिए भी किसी औषधि से कम नहीं है। आयुर्वेद में इलायची का इस्तेमाल सदियों से किया जाता रहा है। खासतौर पर काली इलायची (बड़ी इलायची) में ऐसे कई गुण पाए जाते हैं, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं। आयुर्वेद एक्सपर्ट ऐश्वर्या संतोष के अनुसार, काली इलायची कई स्वास्थ्य समस्याओं में फायदेमंद साबित हो सकती है। आइए जानते हैं कैसे…

एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-सेप्टिक गुणों से भरपूर

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, काली इलायची के बीजों से निकलने वाले तेल में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-सेप्टिक गुण पाए जाते हैं। ये गुण शरीर में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और फंगस को खत्म करने में मदद करते हैं। इसके नियमित सेवन से इम्यूनिटी मजबूत होती है और वायरल व बैक्टीरियल संक्रमण से शरीर की रक्षा होती है।

लिवर को स्वस्थ रखने में मददगार

काली इलायची लिवर के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है। रिसर्च के मुताबिक, यह शरीर से टॉक्सिक तत्वों को बाहर निकालने में मदद करती है। इससे लिवर पर पड़ने वाला दबाव कम होता है और लिवर बेहतर तरीके से काम करता है। जिन लोगों को फैटी लिवर या लिवर से जुड़ी हल्की समस्याएं हैं, उनके लिए काली इलायची उपयोगी हो सकती है।

हृदय स्वास्थ्य को बनाए रखे

काली इलायची का सेवन दिल की सेहत के लिए भी लाभकारी माना जाता है। यह कार्डियक रिदम को संतुलित बनाए रखती है, जिससे ब्लड प्रेशर सामान्य रहता है। साथ ही यह रक्त के थक्के बनने, हीट स्ट्रोक और स्ट्रोक के खतरे को कम करने में मदद करती है। नियमित और सीमित मात्रा में इसका सेवन दिल को मजबूत बनाए रखता है।

पाचन तंत्र के लिए

अगर आपको गैस, ब्लोटिंग, अपच या पेट दर्द जैसी समस्याएं रहती हैं, तो काली इलायची आपके लिए बेहद फायदेमंद हो सकती है। यह पेट के अल्सर के खतरे को कम करती है और पाचन क्रिया को सुधारती है। साथ ही यह भूख बढ़ाने में भी मदद करती है, जिससे शरीर को जरूरी पोषण मिल पाता है।

दांतों और मुंह की सेहत का रखे ख्याल

काली इलायची दांतों और मसूड़ों की सेहत को लंबे समय तक बनाए रखती है। इसमें मौजूद गुण दांतों के संक्रमण और मसूड़ों की सूजन से बचाते हैं। इसकी तेज खुशबू सांसों की बदबू यानी हैलिटोसिस को दूर करने में मदद करती है, जिससे मुंह लंबे समय तक ताजा महसूस करता है।

यूरिनरी और किडनी हेल्थ के लिए फायदेमंद

काली इलायची किडनी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद करती है। यह पेशाब की प्रक्रिया को सुगम बनाती है और बैक्टीरियल ग्रोथ को कम करती है। इससे यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) का खतरा कम हो जाता है। जो लोग बार-बार UTI से परेशान रहते हैं, उन्हें काली इलायची को डाइट में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है।

शरीर को डिटॉक्स करने में सहायक

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रिपोर्ट के अनुसार, काली इलायची शरीर की डिटॉक्सीफिकेशन प्रक्रिया को बेहतर बनाती है। यह खून से कैफीन और अन्य हानिकारक टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करती है। इससे शरीर हल्का महसूस करता है और एनर्जी लेवल भी बेहतर रहता है।

डाइट में काली इलायची शामिल करने के आसान तरीके

काली इलायची को आप कई तरह से अपनी रोजमर्रा की डाइट में शामिल कर सकती हैं। चावल, पुलाव या बिरयानी बनाते समय उबलते पानी में एक इलायची डालने से स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ जाते हैं। सूप, स्टू और सब्जियों में इलायची पाउडर डालकर इन्हें और हेल्दी बनाया जा सकता है। टिक्का या कबाब के मैरिनेड में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा फिरनी, गाजर का हलवा, गुलाब जामुन और रबड़ी जैसी मिठाइयों में भी इलायची का स्वाद लाजवाब लगता है।

ड्रिंक्स में भी करें इस्तेमाल

चाय, ठंडाई, हल्दी वाला दूध या हर्बल टी में काली इलायची डालकर पीना सेहत के लिए फायदेमंद होता है। खांसी-जुकाम में शहद के साथ काली इलायची पाउडर लेने से राहत मिल सकती है।

कितनी मात्रा में करें सेवन

एक दिन में करीब 3 ग्राम काली इलायची के बीज या पाउडर का सेवन पर्याप्त माना जाता है। हालांकि, अगर किसी को एलर्जी, पेट की समस्या या त्वचा पर रिएक्शन हो, तो इसका सेवन तुरंत बंद कर देना चाहिए।

निष्कर्ष

काली इलायची स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी ख्याल रखती है। सही मात्रा और सही तरीके से इसका सेवन करने से इम्यूनिटी मजबूत होती है और शरीर कई बीमारियों से बचा रहता है।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

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