पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया जिसमें उन्होंने कोरोना से हुई लोगों की मौतों के बाद उनके परिजनों को RIL द्वारा आर्थिक सहायता, और बच्चों को एजुकेशन देने का जिक्र किया था। पोस्ट में राजदीप सरदेसाई ने इसे ‘गुड न्यूज’ बताया था। पत्रकार के इस पोस्ट पर वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी ने भी रिएक्ट किया।

राजदीप सरदेसाई ने अपने पोस्ट में कहा था- अच्छी खबर, उन कर्मचारियों के परिवार वालों को 5 साल की सैलरी मिलेगी जिनकी मौतें कोरोना से हुई हैं। साथ ही बच्चों की पढ़ाई, हेल्थ को लेकर भी बेनिफिट्स मिलेंगे। भारत के सबसे अमीर कॉर्पोरेट RIL की तरफ से ये पहल, वेल डन।

पुण्य प्रसून बाजपेयी ने राजदीप के इस ट्वीट पर कहा- ये गुड न्यूज़ नहीं… दर्द की इंतिहा है…सिर्फ़ संवेदनशीलता है। जिसे सरकार गंवा चुकी है। बाजपेयी ने एक और ट्वीट किया जिसमें उन्होंने कहा- ‘दर्द है, त्रासदी है, मौत है, भय है पर सत्ता बेख़ौफ़ है, पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने सवाल दागा। तो क्या वाक़ई सुप्रीम कोर्ट जाग गया ?

पुण्य प्रसून बाजपेयी के इन पोस्ट पर ढेरों लोगों के रिएक्शन आने शुरू हो गए। धीरज नाम के एक यूजर ने कहा- मिस्टर बाजपेयी तुम्हारा दर्द कभी खत्म नहीं होगा। क्योंकि बीजेपी राज में आपका कोई स्थान नहीं। दुर्गेश शर्मा ने कहा- हां, बिलकुल ये गुड न्यूज नहीं है, गुड न्यूज तो गंगा में तैरते शव हैं जिसकी वजह से आपको मुद्दा मिल रहा है। पीजे नाम के एक शख्स बोले- सरकारें कितना भी कर लें, कम लगता है बंधुवर।

सैयद नाम के यूजर ने कहा- यह हम भोले-भाले भारतीय हैं, यह हमारी भाजपा सरकार है। और यूपी चुनाव से पहले सरकार द्वारा, लॉलीपॉप देने का कार्यक्रम शुरू हो गया है। एक ने कहा- जितना सरकार ने वास्तविकता से करा है, उसे विश्व सराहनीय कदम बता रहा है, हमारे यहां लोगों को पेट दर्द की शिकायत है! हम क्या करें?

अरविंद नाम के यूजर ने कहा- संवेदना की कोई जगह ही नहीं है। संतोष ने कहा- कुछ जख्मों के दाग जिंदगी भर साथ रहते है। आयूष नाम के यूजर बोले- दो शब्द उस दोस्त मुल्क के लिए भी बोल दो जिसने ये महामारी दुनिया को गिफ़्ट में दी।