Mizoram Election Result 2018 : मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है, लेकिन मिजोरम में उसका खाता भी खुला है। बीजेपी ने पहली बार मिजोरम में एक सीट पर जीत दर्ज की है। साथ ही, उसका वोटिंग पर्सेंटेज करीब 20 गुना बढ़ गया है। वहीं, मिजोरम में सत्ता गंवाने वाली कांग्रेस का वोट बैंक करीब 14% घटा है।
1993 में पहली बार मैदान में उतरी थी भाजपा</strong>
भाजपा ने मिजोरम के चुनावी मैदान में 1993 में पहली बार ताल ठोंकी थी। हालांकि, पार्टी का आगाज कुछ खास नहीं रहा था। कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाले इस राज्य में बीजेपी को उस दौरान महज 3% वोट मिले थे। इन चुनावों में कांग्रेस को 33.1% वोट मिले थे, लेकिन सत्ता पर मिजो नेशनल फ्रंट (40.4%) काबिज हुई थी।
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1998 में घट गया भाजपा का वोटिंग पर्सेंटेज
भाजपा ने 1998 में भी मिजोरम में अपनी किस्मत आजमाई, लेकिन उसका वोटिंग पर्सेंटेज 3% से घटकर 2.5% रह गया। वहीं, कांग्रेस का वोटिंग पर्सेंटेज सबसे ज्यादा 29.8 रहा, लेकिन वह सिर्फ 6 सीट पर ही जीत हासिल कर सकी। महज 25% वोट पाने के बाद भी मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) सरकार बनाने में कामयाब रही थी।
साल दर साल खराब हुई बीजेपी की हालत
मिजोरम में अपने कदम मजबूत करने के मकसद से बीजेपी लगातार यहां चुनाव लड़ती रही, लेकिन उसकी स्थिति खराब होती चली गई। 2003 में भाजपा को 1.3% वोट मिले। वहीं, 2008 और 2013 में यह आंकड़ा सिर्फ 0.4% पर ही रह गया। हालांकि, इन दोनों चुनावों में कांग्रेस ने वापसी की और दोनों बार सरकार बनाई।
2014 के बाद पूर्वोत्तर में मजबूत हुई भाजपा
2014 में लोकसभा चुनाव की जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वोत्तर को भी फोकस किया। इसके लिए मणिपुर के सेनापति जिले के गांव लाइसंग तक बिजली पहुंचाना भी शामिल है। इसका असर 2018 विधानसभा चुनाव में साफ नजर आया। भाजपा ने न सिर्फ मिजोरम में अपना खाता खोला। साथ ही, वोटिंग पर्सेंटेज में भी 20 गुना बढ़ोतरी दर्ज की। भाजपा को 8%, कांग्रेस को 30.2% और एमएनएफ को 37.6% वोट मिले।
