संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने आतंकवादियों और आतंकी संगठनों की जो नई सूची जारी की है, उससे एक बात साफ है कि वैश्विक शांति के लिए पाकिस्तान बड़ा खतरा बन चुका है। इस सूची में एक सौ उनतालीस नाम ऐसे हैं जो सीधे तौर पर पाकिस्तान से जुड़े हैं। सुरक्षा परिषद की इस सूची में दाऊद इब्राहीम और जमात-उद-दावा के संस्थापक हाफिज सईद का भी नाम है। मुंबई हमलों की साजिश हाफिज सईद ने ही रची थी, जिसमें एक सौ छियासठ लोग मारे गए थे। जबकि 1992 में मुंबई को विस्फोटों से दहला देने वाला सूत्रधार दाऊद इब्राहीम ही था। इसमें तीन सौ से ज्यादा लोग मारे गए थे। सुरक्षा परिषद की इस सूची के आने से ठीक एक दिन पहले अमेरिका ने हाफिज और उसकी पार्टी मिल्ली मुसलिम लीग (एमएमएल) को विदेशी आतंकवादी संगठन की सूची में डाल दिया है। एमएमएल हाफिज के संगठन जमात-उद-दावा की राजनीतिक इकाई है और यह पार्टी जुलाई में पाकिस्तान के संभावित अगले आम चुनाव में शिरकत करने जा रही है। सियासत को सीधे प्रभावित कर हाफिज पाकिस्तान को किधर ले जाएगा?
आतंकवाद की मार झेल रहे भारत सहित कई देश सुरक्षा परिषद में लंबे समय से पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा परिषद की इस सूची के दूरगामी संदेश हैं। इसमें अब कोई दो राय नहीं कि पाकिस्तान आतंकवादियों की पनाहगाह बन चुका है। इन आतंकी संगठनों पर आइएसआइ का वरदहस्त है। इन्हीं से आतंकी संगठनों को हथियार, पैसा और प्रशिक्षण मिलता है। ये आतंकी संगठन भारत ही नहीं, अफगानिस्तान में भी कहर बरपाने की फिराक में रहते हैं। अल कायदा ने यूरोप और अमेरिका तक की नींद उड़ा दी है। लादेन को पाकिस्तान ने अपने यहां सुरक्षित ठिकाना मुहैया करा रखा था। अब जवाहिरी को छिपा रखा है। क्या पाकिस्तान इस सच को झुठला पाएगा कि वह अपनी जमीन से आतंकवादी गतिविधियां नहीं चलने दे रहा है?
भारत लंबे समय से पाकिस्तान से मांग कर रहा है कि वह मुंबई विस्फोटों के जिम्मेवार दाऊद इब्राहीम को उसे सौंपे। लेकिन पाकिस्तान शुरू से ही इस तथ्य का खंडन करता रहा है कि दाऊद उसके यहां है। वैश्विक मंचों से भी पाकिस्तान ने बार-बार यही कहा कि दाऊद उसके यहां नहीं है। लेकिन सुरक्षा परिषद ने पाकिस्तान में दाऊद की मौजूदगी का जो ब्योरा दिया है, उससे उसके झूठ की पोल खुल गई है। सुरक्षा परिषद ने बताया है कि दाऊद के पास कई पासपोर्ट हैं, जो रावलपिंडी और कराची से जारी हुए हैं। कराची के नूराबाद में दाऊद का बड़ा बंगला है। सवाल है कि इसके बाद पाकिस्तान को और क्या सबूत चाहिए? हाफिज सईद और दाऊद इब्राहीम दोनों की इंटरपोल को तलाश है। दुनिया जान चुकी है कि दोनों पाकिस्तान की पनाह में हैं। तो फिर क्या वजह है कि इंटरपोल की पहुंच से दोनों आज भी बाहर हैं? अब सुरक्षा परिषद की यह सूची भी पाकिस्तान को संभलने के लिए कड़ा संदेश है। पाकिस्तान या तो अपनी हरकतों से बाज आए और आतंकवाद पर लगाम लगाए, या फिर कड़ी कार्रवाई को तैयार रहे। अब पाकिस्तान क्या फैसला करना चाहेगा, यह देखने की बात है!

