Iran Protest: ईरान की सड़कों पर फिर से सत्ता विरोधी हुंकार सुनाई देने लगी है। जगह-जगह विरोध प्रदर्शन और हिंसा की घटनाएं सामने आ रही हैं। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले दो सप्ताह के दौरान हिंसक झड़पों में अब तक पांच सौ से अधिक लोगों की मौत हो जाने और दस हजार से ज्यादा लोगों को हिरासत में लेने का दावा किया जा रहा है।
इसी बीच ईरान का अमेरिका और इजराइल के साथ तनाव भी बढ़ता जा रहा है। अमेरिका ने तो यह चेतावनी भी दे डाली है कि अगर प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया गया, तो वह ईरान पर हमले की कार्रवाई करेगा।
सवाल है कि आखिर ईरान में लोगों का शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ सड़कों पर उतरने का कारण क्या है? विरोध प्रदर्शन का झंडा बुलंद करने वालों को कहना है कि लोग देश की आर्थिक बदहाली और बढ़ती महंगाई से त्रस्त हैं। वहीं, ईरान सरकार का आरोप है कि यह सब अमेरिका के इशारे पर हो रहा है, ताकि उनके देश को अस्थिर किया जा सके। ईरान में विरोध प्रदर्शनों पर एक सवाल यह भी उठ रहा है कि वहां की सरकार की ओर से आंतरिक मामलों को सुलझाने और जनता का भरोसा जीतने का समय रहते प्रयास क्यों नहीं किया गया?
इस मुल्क में ऐसे ही विरोध प्रदर्शन वर्ष 2022 में भी देखे गए थे, जब महसा अमीनी नामक एक महिला की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी। महसा पर आरोप था कि उसने हिजाब के कानून को नहीं माना, जिस कारण उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। इस घटना के बाद देश भर में महिलाएं सड़कों पर उतर आई थीं। इस बार भले ही मुद्दा अलग है, लेकिन विरोध प्रदर्शनों में पहले की तरह महिलाएं बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रही हैं।
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तनाव बढ़ने के बाद कई शहरों में इंटरनेट पर पाबंदी लगा दी गई है, सड़कों पर सुरक्षाबल मोर्चा संभाले हुए हैं और इस दौरान हिंसक झड़पें भी हो रही हैं। इसी बीच सोमवार को सरकार समर्थक भी सड़कों पर उतर आए, जिससे हालात और बिगडने की आशंका है। ऐसे में ईरान सरकार को चाहिए कि अंदरूनी मसलों को सुलझाने के लिए सुरक्षा बलों की ताकत का सहारा लेने के बजाय शांतिपूर्ण तरीके से समाधान के रास्ते तलाशे जाएं।
दूसरी ओर ईरान में विरोध प्रदर्शनों को वहां के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को सत्ता से हटाने की कोशिशों से जोड़ कर भी देखा जा रहा है। इसके पीछे अमेरिका और इजराइल का हाथ होने की आंशका इसलिए जोर पकड़ रही है, क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल में जारी एक बयान में कहा है कि ईरान की जनता आजादी चाहती है, जो उसने पहले कभी महसूस नहीं की। साथ ही प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग करने पर कार्रवाई की धमकी भी दी है।
इस पर ईरान ने भी चेतावनी दी है कि अगर हमला हुआ, तो अमेरिका के ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा। हालांकि दोनों देशों में बढ़ते तनाव के बीच फिलहाल राहत की बात यह कि अमेरिका के राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान वर्तमान हालात को लेकर बातचीत के लिए तैयार हो गया है। अब देखना होगा कि क्या ईरान कोई ऐसा रास्ता निकाल पाता है, जिससे विरोध प्रदर्शन खत्म हो जाएं और मौजूदा संकट भी टल जाए?
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