इस समय कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए जो चिकित्साकर्मी, पुलिस बल आदि हर संभव प्रयास कर रहे हैं, वही संक्रमण की गिरफ्त में आने से नहीं बच पा रहे। बड़ी संख्या में चिकित्साकर्मियों और पुलिसकर्मियों के संक्रमित होने के आंकड़े आ रहे हैं। इनके साथ-साथ संक्रमित होने वालों में अच्छी-खासी संख्या चिकित्सा वाहनों यानी एंबुलेंस चलाने वालों की भी है। इस तरह जिन लोगों पर संक्रमण रोकने और संक्रमितों को इलाज उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी है, अगर वही बीमार होते रहेंगे, तो फिर चिकित्सा व्यवस्था को सुचारु और भरोसेमंद बनाने में स्वाभाविक ही गतिरोध पैदा होगा। जिस तरह संक्रमितों के संपर्क में आने से चिकित्साकर्मियों में संक्रमण फैल रहा है, उसी तरह एंबुलेंस चालकों में भी इसका फैलाव हो रहा है। कई जगहों पर चालकों के संक्रमित पाए जाने के बाद एंबुलेंस सेवाएं ही बंद करनी पड़ीं। इस तरह मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में कठिनाइयां पैदा हो रही हैं। एंबुलेंस में चूंकि जरूरी जीवन रक्षक उपकरण लगे होते हैं, गंभीर हालत में मरीजों को अस्पताल ले जाने के लिए उनका इस्तेमाल जरूरी होता है। कोरोना संक्रमण में मरीज को सांस लेने में तकलीफ होती है, इसलिए उसे सामान्य वाहन से अस्पताल ले जाने की कोशिश खतरनाक साबित हो सकती है। इसी तरह कई दूसरी बीमारियों में एंबुलेंस के अलावा मरीज को सामान्य वाहन में अस्पताल नहीं ले जाया जा सकता। ऐसे में चालक न होने के कारण एंबुलेंस सेवाएं न चल पाएं, तो यह एक अलग परेशानी का कारण है।
चिकित्साकर्मियों और पुलिसकर्मियों में संक्रमण फैलने की बड़ी वजह आवश्यक सुरक्षा परिधान आदि उपलब्ध न हो पाना बताया जाता है। कई जगहों से इसे लेकर शिकायतें भी आईं। एंबुलेंस चालक भी चूंकि चिकित्साकर्मियों की तरह सीधे मरीजों के संपर्क में आते हैं, इसलिए उन्हें भी निजी सुरक्षा परिधान पहनने की जरूरत होती है। मगर चूंकि बहुत सारे एंबुलेंस सेवाएं देने वाले निजी तौर पर उनका संचालन करते हैं, वे ऐसी सावधानी बरतते नहीं देखे जाते। उनके चालक महज मुंह ढंक कर, हाथों में दस्ताने पहन कर या कुछ-कुछ दिनों पर गाड़ी को विसंक्रमित करके अपनी जिम्मेदारी पूरी समझ लेते हैं। इन्हीं लापरवाहियों की वजह से ज्यादातर एंबुलेंस चालक कोरोना की चपेट में आए। समझना मुश्किल है कि एंबुलेंस चालकों की सुरक्षा को लेकर कड़ाई कैसे नहीं बरती गई।
इस समय जब कोरोना संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, एंबुलेंस सेवाओं की जरूरत भी अधिक है। ऐसे में अगर चालकों के संक्रमित होने की वजह से एंबुलेंस सेवाएं बंद करनी पड़ रही हैं, तो मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना कठिन होता जाएगा। फिर एंबुलेंस सेवाओं की जरूरत केवल कोरोना मरीजों के लिए नहीं पड़ती, बहुत सारे ऐसे भी मरीजों को रोज अस्पताल पहुंचाने की जरूरत पड़ती है, जो अन्य बीमारियों की वजह से गंभीर स्थिति में पहुंच जाते हैं। इसका असर उन लोगों पर भी पड़ेगा। एंबुलेंस चालकों के संक्रमित होने का अर्थ है कि उनके जरिए बहुत सारे ऐसे लोगों तक भी विषाणु पहुंचने का खतरा होता है, जो स्वस्थ हैं। कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के मामले में कई मोर्चों पर सरकारों की तैयारियों पर अंगुलियां उठ रही हैं। उसमें चिकित्सा सेवाओं में जरूरी सावधानी का अभाव भी एक है। कई अस्पतालों में ऐसे विभागों में भर्ती मरीजों तक संक्रमण फैल गया, जहां कोरोना मरीज भर्ती नहीं होते। एंबुलेंस सेवाओं के मामले में भी ऐसी ही लापरवाही संक्रमण को फैलने से रोकने में बाधा बन रही है।

