दिल्ली कोर्ट ने हत्या के 3 आरोपियों को बरी कर दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने मामले की जांच करने वाले अधिकारी को लापरवाही के लिए फटकार भी लगाई। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि जो हत्यारा है वह फरार चल रहा है और निर्दोषों को आरोपी बनाकर मुकदमा चलाया जा रहा है। कोर्ट ने आगे कहा कि मामले में लापरवाही से जांच की गई और जानबूझकर असली हत्यारे को बचाने की कोशिश की गई। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह मामला नरबलि का लगता है। दरअसल, दिसंबर 2014 में बवाना इलाके में एक क्षत-विक्षत शव मिला था। इस मामले में 3 लोगों को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। एडिशनल सेशन जज धीरेंद्र राणा इसी मामले की सुनवाई कर रहे थे।
सरकारी वकील ने किया शराब के आदि होने का दावा, कोर्ट ने दिया ये जवाब
सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने दावा किया कि मृतक मंजीत और गिरफ्तार किए गए तीन आरोपी नशे के आदी थे। घटना वाले दिन मंजीत ने उन्हें शराब देने से मना कर दिया था। जिससे आरोपी नाराज हो गए और उसकी हत्या कर दी। हालांकि जज ने कहा कि आरोपियों और मृतक के ब्लड सैंपल में नशीले पदार्थ नहीं मिले। ना घटना स्थल से कोई नशीला पदार्थ बरामद हुआ। इस तरह अभियोजन पक्ष का यह दावा पूरी तरह से खारिज हो जाता है कि आरोपी और मृतक घटनास्थल पर शराब पी रहे थे। जिसे लेकर उनमें विवाद हुआ और फिर पीड़ित की हत्या कर दी गई।
कोर्ट ने यह भी हैरानी जताई कि ब्लेड का इस्तेमाल सिर काटने और शरीर को क्षत-विक्षत करने के लिए कैसे किया जा सकता है। हमले में उसके सीने की हड्डियां भी दिखाईं दे रही थीं। कोर्ट ने कहा कि जांच करने वाले अधिकारी ने मृतक के सिर का भी पता लगाने की कोशिश नहीं की।
नरबलि के मिले संकेत
कोर्ट ने आगे कहा कि घटना वाली जगह से नरबलि के संकेत मिले लेकिन अधिकारी ने इस बारे में कोई जांच नहीं की। इसके बाद कोर्ट ने तीनों आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष उचित संदेह से परे उनके खिलाफ मामला साबित करने में विफल रहा है।
अदालत ने कहा, ‘‘घटनास्थल से नरबलि के संकेत मिले, लेकिन आईओ ने इस संदर्भ में जांच नहीं करने का विकल्प चुना।’’ इसने तीनों आरोपियों को बरी कर दिया और कहा कि अभियोजन पक्ष उचित संदेह से परे उनके खिलाफ मामला साबित करने में विफल रहा है। अदालत ने संबंधित पुलिस उपायुक्त को आईओ के खिलाफ उचित विभागीय कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
