India Q2 GDP Growth Data 2025: भारत Q2 GDP वृद्धि डेटा 2025: राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (Q2) के लिए भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर जारी की। सितंबर में समाप्त हुई दूसरी तिमाही में भारत की GDP 8.2% बढ़ी। गौर करने वाली बात है कि यह पिछली छह तिमाहियों में सर्वाधिक है।
शुक्रवार, 28 नवंबर को जारी आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 5.6 प्रतिशत रही थी। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत थी। जीडीपी का मतलब देश की सीमा के भीतर निश्चित अवधि में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य से है।
जीएसटी दरों में कटौती के बाद खपत बढ़ने की उम्मीद में कारखानों ने उत्पादन तेज किया, जिससे वृद्धि दर में तेज उछाल देखी गई। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, आलोच्य तिमाही में विनिर्माण क्षेत्र 9.1 प्रतिशत बढ़ा।
पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह वृद्धि मात्र 2.2 प्रतिशत थी। विनिर्माण क्षेत्र का देश की जीडीपी में 14 प्रतिशत योगदान है।
GDP पर PM की पहली प्रतिक्रिया
देश की अर्थव्यवस्था में आई तेजी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने X (Twitter) पर पोस्ट किया, ”2025-26 की दूसरी तिमाही में 8.2% की GDP वृद्धि बहुत उत्साहजनक है। यह हमारी विकास-उन्मुख नीतियों और सुधारों के प्रभाव को दर्शाती है। यह हमारे लोगों की मेहनत और उद्यमशीलता को भी प्रतिबिंबित करती है। हमारी सरकार सुधारों को आगे बढ़ाने और हर नागरिक के लिए जीवन को आसान बनाने के लिए लगातार काम करती रहेगी।”
‘उच्च आर्थिक विकास की दर टिकाऊ नहीं’
आर्थिक विकास दर के ताजा आंकड़े जारी होने के बाद कांग्रेस ने शुक्रवार को दावा किया कि अर्थव्यवस्था की स्थिति निराशाजनक बनी हुई है तथा उच्च आर्थिक विकास की दर टिकाऊ नहीं है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत के राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी की अपनी वार्षिक समीक्षा में देश के सकल घरेलू उत्पाद और सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) सहित महत्वपूर्ण आंकड़ों को ‘सी’ ग्रेड दिया है।
रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘यह विडंबना है कि विकास दर के तिमाही आंकड़े उस वक्त जारी किए गए जब आईएमएफ की रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था के वार्षिक मूल्यांकन में भारत के राष्ट्रीय खातों के आंकड़ों को ‘सी’ श्रेणी में रखा है जो दूसरी सबसे निचली श्रेणी में हैं।’’ उनका कहना है, ‘‘आंकड़ों की स्थिति निराशाजनक बनी हुई है। सकल स्थिर पूंजी निर्माण में कोई वृद्धि नहीं हुई है। निजी निवेश में किसी भी नई गति के अभाव में उच्च जीडीपी विकास दर टिकाऊ नहीं है। यह स्पष्ट रूप से साक्ष्य में नहीं है।’’

